Bihar News: पटना के प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में करोड़ों के आधुनिक चिकित्सा उपकरण धूल फांक रहे हैं। अस्पताल में दो करोड़ रुपये से अधिक लागत की पीईटी स्कैन मशीन पिछले दो साल से बंद पड़ी है। इस लापरवाही के कारण गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को जांच का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
अस्पताल प्रशासन की इस बड़ी ढिलाई से कैंसर जैसे मरीजों की परेशानी काफी बढ़ गई है। यह मशीन पूरी तरह से चालू हालत में होने के बाद भी केवल मैनपावर की भारी कमी के कारण बंद है। इसकी वजह से गरीब मरीजों को निजी सेंटरों में महंगी जांच करानी पड़ रही है।
तकनीशियन भर्ती का विज्ञापन तक नहीं हुआ जारी
शुरुआती दौर में अस्पताल में संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी थी। इस कारण पीईटी स्कैन सेवा की शुरुआत समय पर नहीं हो सकी। बाद में सरकार ने डॉक्टरों की नियुक्ति तो कर दी, लेकिन अब तकनीशियन के सभी जरूरी पद खाली होने से यह मशीन बेकार पड़ी हुई है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इस विभाग में तकनीशियन के चार पद स्वीकृत हैं। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने अब तक भर्ती के लिए कोई आधिकारिक विज्ञापन जारी नहीं किया है। इस बड़ी प्रशासनिक लापरवाही के चलते स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है और मरीज बेहद लाचार हैं।
निजी हाथों में सेवा सौंपने की हो रही तैयारी
अस्पताल के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक प्रबंधन अब इस सरकारी पीईटी स्कैन सेवा को आउटसोर्सिंग के जरिए चलाना चाहता है। संस्थान के कई वरिष्ठ डॉक्टर इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं। फिलहाल अस्पताल में नई एमआरआई सेवा को पीपीपी मोड के जरिए ही संचालित किया जा रहा है।
इसके अलावा संस्थान में एक अन्य एमआरआई मशीन लगाने की प्रक्रिया भी चल रही है। वर्तमान में तीन सीटी स्कैन, छह एक्स-रे और 12 से अधिक अल्ट्रासाउंड मशीनों से जांच हो रही है। इन चालू मशीनों पर प्रतिदिन आने वाले मरीजों का भारी दबाव बना रहता है।
मरीजों की परेशानी यहीं खत्म नहीं होती है। अस्पताल के मेडिसिन ब्लॉक में अब तक एयर कंडीशनिंग सिस्टम पूरी तरह चालू नहीं हो पाया है। भीषण गर्मी में कूलिंग न होने से भर्ती मरीजों और वहां तैनात स्वास्थ्य कर्मचारियों का हाल बेहाल है। इस समस्या पर भी प्रबंधन मौन है।
Author: Amit Yadav


