हिमाचल में सुक्खू सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी होटलों में वीआईपी नेताओं को मुफ्त सुविधाएं मिलना बंद

Himachal News: हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने वित्तीय संकट से निपटने के लिए एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। सरकार ने हिमाचल प्रदेश टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन यानी एचपीटीडीसी के बड़े पदाधिकारियों को मिलने वाले वीआईपी डिस्काउंट और मुफ्त सुविधाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

एचपीटीडीसी के बड़े अफसरों पर गिरेगी वित्तीय सख्ती की गाज

सरकार के इस कड़े फैसले का सीधा असर टूरिज्म कॉर्पोरेशन के चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर पर पड़ने वाला है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सरकारी और गैर-सरकारी सदस्य भी अब मुफ्त सुविधाओं का मजा नहीं ले पाएंगे। टूरिज्म मैनेजमेंट ने फिजूलखर्ची रोकने के लिए सरकार को खुद यह नया प्रपोजल भेजा था।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस प्रपोजल की फाइल को मंजूरी देकर सरकारी खजाने पर बढ़ते बोझ को कम करने की कोशिश की है। अब तक इन सभी वीआईपी नेताओं और अधिकारियों को कॉर्पोरेशन के लग्जरी होटलों में रुकने और खाने-पीने पर भारी सब्सिडी मिलती थी। अब यह पुरानी व्यवस्था पूरी तरह बदल गई है।

वीआईपी को केवल सौ रुपये में मिलता था होटल का कमरा

पुरानी व्यवस्था के तहत चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर को टूरिज्म कॉर्पोरेशन के आलीशान होटलों में रहने के लिए सिर्फ 100 रुपये प्रतिदिन देने होते थे। इसके अलावा होटलों के महंगे रेस्तरां में भोजन करने पर उन्हें 50 परसेंट की भारी छूट मिलती थी। रिटायरमेंट के बाद भी यह सब्सिडी लगातार जारी रहती थी।

नए नियमों के अनुसार अब इन सभी पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों से आम जनता की तरह पूरा चार्ज वसूला जाएगा। सुक्खू सरकार के इस फैसले से केवल कॉर्पोरेशन के ग्राउंड स्टाफ और नियमित कर्मचारियों को ही राहत रहेगी। कर्मचारियों को होटलों में मिलने वाली पुरानी रियायतें पहले की तरह मिलती रहेंगी।

बच्चों की शादी और लाइफटाइम डिस्काउंट की सुविधा भी खत्म

कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर्स को मीटिंग्स के दौरान मुफ्त ठहरने और खाने की सुविधा के साथ-साथ जीवनभर के लिए 30 परसेंट का लाइफटाइम डिस्काउंट मिलता था। इसके अलावा मैनेजिंग डायरेक्टर के बच्चों की शादी के लिए होटल बुकिंग पर 50 परसेंट और खाने पर 40 परसेंट की बड़ी छूट मिलती थी।

ट्रांसपोर्टेशन पर मिलने वाली 20 परसेंट की छूट को भी सरकार ने अब पूरी तरह से खत्म कर दिया है। सरकार का मानना है कि इस सख्त फैसले से राज्य में एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी। इससे टूरिज्म कॉर्पोरेशन की वित्तीय स्थिति सुधरेगी और जनता के टैक्स का पैसा बचेगा।

Reported By: Sunita Gupta

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