तमिलनाडु में फिर लौटेगा एमजीआर और करुणानिधि जैसा खूंखार राजनीतिक युद्ध? बीजेपी छोड़ नई पार्टी बना सकते हैं दिग्गज नेता के अन्नामलाई

Tamil Nadu News: दक्षिण भारत की राजनीति में इस वक्त बहुत बड़ा भूचाल आ गया है. सूबे के पूर्व बीजेपी अध्यक्ष के अन्नामलाई के राजनीतिक भविष्य को लेकर कयासबाजी तेज हो गई है. उनके करीबी समर्थक इस पूरे घटनाक्रम की तुलना तमिलनाडु के इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक दुश्मनी से कर रहे हैं.

दावा किया जा रहा है कि अन्नामलाई जल्द ही बीजेपी को हमेशा के लिए अलविदा कह सकते हैं. वे अपनी एक बिल्कुल नई राजनीतिक पार्टी बनाने पर बेहद गंभीरता से विचार कर रहे हैं. इस खबर के बाहर आते ही राज्य की दोनों बड़ी द्रविड़ पार्टियों के खेमे में भयंकर हड़कंप मच गया है.

सुपरस्टार विजय और अन्नामलाई के बीच होगी ऐतिहासिक महाजंग

अन्नामलाई के करीबी सूत्रों का कहना है कि वे बीजेपी से अलग होकर अपना नया मंच तैयार करेंगे. इसके बाद तमिलनाडु में राज्य के दो सबसे लोकप्रिय युवाओं के बीच सीधी जंग होगी. तब मुकाबला टीवीके (TVK) के प्रमुख सुपरस्टार विजय और के अन्नामलाई की दो गैर-द्रविड़ पार्टियों के बीच सिमट जाएगा.

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक विजय बनाम अन्नामलाई की यह सीधी जंग ठीक वैसी ही होगी, जैसी कभी दिवंगत दिग्गज नेता एमजी रामचंद्रन (MGR) और एम करुणानिधि के बीच देखने को मिलती थी. हालांकि ये नए नेता उन पुराने सर्वमान्य महानायकों का मुकाबला कभी नहीं कर सकते हैं.

द्रविड़ आंदोलन के छह दशक पुराने किले में भयंकर दरार

साल 1967 में डीएमके के संस्थापक सीएन अन्नादुरई ने सूबे से कांग्रेस का एकछत्र दबदबा पूरी तरह खत्म कर दिया था. इसके बाद से राज्य की सत्ता मुख्य रूप से एमजीआर और करुणानिधि के इर्द-गिर्द घूमती रही. एमजीआर ने डीएमके से अलग होकर अपनी नई पार्टी एआईएडीएमके बनाई थी.

एमजीआर ने लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीते और साल 1987 में अपनी मृत्यु तक सूबे के मुख्यमंत्री रहे. उनकी मौत के बाद करुणानिधि ने फिर सत्ता संभाली और वे पांच बार मुख्यमंत्री बने. लगभग छह दशक बाद अब अभिनेता से नेता बने विजय ने दोनों द्रविड़ पार्टियों को तगड़ी चुनौती दी है.

अंदरूनी बगावत और लगातार हार से संकट में एआईएडीएमके

पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता के निधन के बाद से एआईएडीएमके लगातार कमजोर हो रही है. पार्टी को लगातार चार बड़े चुनावों में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है. हाल ही में पार्टी के करीब 25 विधायकों ने बगावत करते हुए विधानसभा में टीवीके सरकार के पक्ष में खुला मतदान किया था.

सुपरस्टार विजय के साथ सत्ता समझौता करने की एआईएडीएमके की आखिरी कोशिश भी पूरी तरह फेल साबित हुई है. इस राजनीतिक शून्यता के बीच अन्नामलाई के समर्थकों का मानना है कि राज्य की जनता अब पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से ऊब चुकी है और वह एक नया साफ-सुथरा विकल्प चाहती है.

हिंदुत्व की जगह तमिल राष्ट्रवाद को मुख्य एजेंडा बनाएंगे अन्नामलाई

विशेषज्ञों के मुताबिक बीजेपी की पारंपरिक हिंदुत्व राजनीति को तमिलनाडु की धरती पर पैर पसारने में हमेशा से भारी दिक्कतें हुई हैं. इसी वजह से पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई अब अपनी नई राजनीति को पूरी तरह ‘तमिल राष्ट्रवाद और सुशासन’ के मुख्य एजेंडे के आसपास केंद्रित करना चाहते हैं.

यह बड़ा रणनीतिक बदलाव अन्नामलाई को उन रूढ़िवादी धारणाओं से दूर रखेगा जिन्होंने हमेशा दक्षिण में बीजेपी की तरक्की को रोका है. जहां अभिनेता विजय के पास एक कल्ट सिनेमाई फॉलोइंग है, वहीं अन्नामलाई ने सोशल मीडिया और जमीनी अभियानों के दम पर युवाओं में अपनी धाकड़ पहचान बनाई है.

चुनावी अखाड़े में उतरने से पहले नया राजनीतिक इकोसिस्टम तैयार करने की योजना

पूर्व पुलिस अफसर अन्नामलाई जल्द ही एक विशाल जन आंदोलन शुरू करने वाले हैं. इसका मुख्य मकसद चुनावी राजनीति में औपचारिक एंट्री से पहले राज्य भर में जागरूक वॉलंटियर्स की एक नई पीढ़ी खड़ी करना है. वे अपनी शर्तों पर काम करने के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम बना रहे हैं.

रणनीतिकार एस्पायर स्वामीनाथन का मानना है कि राज्य की राजनीति में पांचवीं जगह अभी भी पूरी तरह खाली है. जनता को एक सिनेमा रहित, गैर-वंशवादी और तमिल गौरव पर आधारित साफ-सुथरा विकल्प चाहिए. अन्नामलाई इसी बड़े राजनीतिक शून्य को भरने की पूरी तैयारी में जुटे हैं.

सत्तारूढ़ डीएमके खेमे में बढ़ी बेचैनी, अन्नामलाई की क्षमता पर उठाए सवाल

अन्नामलाई के इस बड़े मास्टरस्ट्रोक से सत्तारूढ़ डीएमके बिल्कुल भी खुश नजर नहीं आ रही है. डीएमके के मुख्य प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने तंज कसते हुए कहा कि हमें नहीं पता कि अन्नामलाई के मन में क्या चल रहा है. द्रविड़ विचारधारा तमिल संस्कृति की आत्मा है.

एलंगोवन ने चुनौती देते हुए कहा कि हमें देखना होगा कि एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने इस महान तमिल विचारधारा को कितना समझा है. दूसरी ओर अन्नामलाई ने अभी तक बीजेपी छोड़ने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है. वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी असली राजनीतिक प्रेरणा मानते हैं.

Author: Karthik Srinivasan

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