भारत-यूके ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट संकट में? क्या देश में अब बहुत महंगी हो जाएगी ब्रिटिश स्कॉच और व्हिस्की? समझिए पूरा गणित

International News: भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच हुआ ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) अब बड़े संकट में घिर गया है. ब्रिटेन द्वारा भारतीय स्टील पर लगाए गए नए प्रतिबंधों और कार्बन टैक्स विवाद के कारण दोनों देशों के मजबूत आर्थिक रिश्तों में भारी खटास आ गई है.

इस बड़े विवाद के कारण भारत में ब्रिटिश स्कॉच और व्हिस्की की कीमतों में भारी उछाल आने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है. नई दिल्ली ने लंदन को साफ संदेश दिया है कि व्यापार समझौते के तहत मिलने वाली टैक्स रियायतें अब स्वतः ही बिल्कुल लागू नहीं होंगी.

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की बैठक से पहले बढ़ा भारी दबाव

यह बड़ा व्यापारिक विवाद ठीक ऐसे समय पर सामने आया है जब भारत के केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश व्यापार सचिव पीटर काइल के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है. दोनों देशों की यह मुलाकात इस एग्रीमेंट का भविष्य तय करेगी.

भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अगर ब्रिटेन ने भारतीय स्टील एक्सपोर्ट पर लगे प्रतिबंध वापस नहीं लिए, तो भारत भी ब्रिटिश स्कॉच पर आयात शुल्क (Import Duty) बढ़ा देगा. वर्तमान में भारत में ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की पर पूरे 150 प्रतिशत का भारी शुल्क लगता है.

प्रस्तावित सीटीए के तहत घटनी थी स्कॉच की भारी इंपोर्ट ड्यूटी

दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) के तहत स्कॉच पर लगी इस भारी ड्यूटी को घटाकर तत्काल 75 प्रतिशत किया जाना था. इसके साथ ही अगले 10 वर्षों में इसे क्रमिक रूप से घटाकर मात्र 40 प्रतिशत तक लाने का प्लान था.

भारत वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा व्हिस्की बाजार है. ऊंचे टैक्स के कारण अभी यहां असली स्कॉच की हिस्सेदारी बेहद सीमित है. ब्रिटिश कंपनियों को उम्मीद थी कि शुल्क कटौती के बाद जॉन वॉकर और शिवाज रीगल जैसे ब्रांड्स की बिक्री भारत में रिकॉर्ड तोड़ रफ्तार पकड़ेगी.

ब्रिटेन लागू करने जा रहा है नया स्टील सुरक्षा ढांचा और भारी टैरिफ

ब्रिटेन आगामी 1 जुलाई 2026 से एक नया सख्त स्टील सुरक्षा ढांचा लागू करने जा रहा है. इसके तहत वह विदेशी स्टील के फ्री-ट्रेड इम्पोर्ट कोटे में 60 प्रतिशत की भारी कटौती करेगा. निर्धारित कोटा पार करने वाले भारतीय स्टील पर 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगेगा.

इस नए कानून से भारतीय एक्सपोर्टर्स को बहुत बड़ा झटका लगेगा. वित्तीय वर्ष 2026 में भारत ने ब्रिटेन को करीब 897.68 मिलियन डॉलर का लोहा और स्टील एक्सपोर्ट किया था. यह ब्रिटेन के साथ भारत के कुल 13.4 बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का बेहद अहम हिस्सा है.

जनवरी 2027 से लागू होने वाला कार्बन टैक्स बना नई मुसीबत

ब्रिटेन के इस मनमाने कदम से केवल भारत ही नहीं, बल्कि ब्राजील, तुर्की, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े देशों ने भी विश्व व्यापार संगठन (WTO) में अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है. इसके अलावा जनवरी 2027 से लागू होने वाला नया कार्बन टैक्स भी बड़ी मुसीबत बन गया है.

इसके तहत एल्यूमीनियम, सीमेंट और स्टील जैसे कार्बन-गहन उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा. आर्थिक थिंक टैंक जीटीआरआई के अनुसार, इससे भारत का लगभग 775 मिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट प्रभावित होगा. दोनों देशों का अनुमान था कि इस समझौते से 2040 तक द्विपक्षीय व्यापार में 34 बिलियन डॉलर की भारी बढ़ोतरी होगी.

Author: Pallavi Sharma

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