Delhi News: दुनिया की बड़ी वीजा आउटसोर्सिंग कंपनी वीएफएस ग्लोबल इस समय गंभीर संकट में घिर गई है। कंपनी पर अपने वीजा सुविधा केंद्रों के जरिए बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने के आरोप लगे हैं। कई यूरोपीय संघ (EU) की आधिकारिक निरीक्षण रिपोर्टों के आधार पर यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है।
नीदरलैंड के खोजी पत्रकारों के समूह ‘लाइटहाउस रिपोर्ट्स’ ने इस पूरे मामले की गहराई से जांच की है। इस समूह ने साल 2020 से 2025 के बीच करीब 20 सदस्य देशों की निरीक्षण रिपोर्टों का बारीकी से अध्ययन किया। इसमें वीएफएस ग्लोबल के वीजा सेंटरों में कई बड़ी कमियां पाई गई हैं।
इस जांच रिपोर्ट में विशेष रूप से भारत के कई बड़े शहरों के केंद्रों को शामिल किया गया है। इनमें देश की राजधानी नई दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, चंडीगढ़ और जालंधर जैसे शहर प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन केंद्रों पर काम करने के तौर-तरीकों में कई गंभीर खामियां और गड़बड़ियां सामने आई हैं।
यूजर डेटा के प्रबंधन में बड़ी लापरवाही का आरोप
हालिया जांच रिपोर्टों के अनुसार वीएफएस ग्लोबल पर ग्राहकों के व्यक्तिगत डेटा के प्रबंधन में भारी लापरवाही बरतने के आरोप लगे हैं। इसके साथ ही कंपनी पर आवेदकों को जानबूझकर बहुत महंगी वैल्यू-एडेड (अतिरिक्त) सेवाएं खरीदने के लिए मजबूर करने के भी बड़े आरोप लगाए गए हैं।
इन अनैतिक गतिविधियों के कारण आम लोगों के लिए वीजा प्रक्रिया की कुल लागत बहुत ज्यादा बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर इन आरोपों के सार्वजनिक होने के बाद से हंगामा मच गया है। देश-विदेश के कई पीड़ित ग्राहकों ने अब वीएफएस ग्लोबल के साथ अपने बेहद खराब अनुभव शेयर करने शुरू कर दिए हैं।
सोशल मीडिया पर पीड़ित ग्राहकों ने बयां किया अपना दर्द
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर एक यूजर @BhosalePratim ने लिखा कि वीजा से जुड़ी 90 प्रतिशत समस्याओं के लिए सीधे तौर पर वीएफएस ग्लोबल जिम्मेदार है। उन्होंने इस बात पर भी गहरा अफसोस जताया कि इतनी खराब सेवाएं देने वाली इस वैश्विक कंपनी की शुरुआत भारत से हुई थी।
यूजर ने आरोप लगाया कि कंपनी के कर्मचारी ग्राहकों को प्रीमियम परामर्श लेने के लिए मानसिक रूप से मजबूर करते हैं। कर्मचारियों का साफ कहना होता है कि अगर ग्राहक प्रीमियम शुल्क का भुगतान नहीं करेंगे, तो उनके जरूरी दस्तावेजों की जांच नहीं की जाएगी। इससे आवेदकों के पास कोई विकल्प नहीं बचता।
एक अन्य पीड़ित ग्राहक अपूर्वा गोविंद ने कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे सबसे बड़ा स्कैम बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र के भीतर केवल एक बैकपैक (बैग) ले जाने के लिए भी उनसे अतिरिक्त पैसे वसूले गए। तीसरे यूजर ने कहा कि इस जांच से साबित हो गया कि कंपनी बिना सहमति के जबरन वसूली करती है।
वीएफएस ग्लोबल ने दी सफाई, आरोपों को बताया बेबुनियाद
इन सभी गंभीर आरोपों पर वीएफएस ग्लोबल ने आधिकारिक बयान जारी कर इन्हें पूरी तरह खारिज कर दिया है। कंपनी का कहना है कि उनकी सभी सेवाएं संबंधित सरकारों की कड़ी निगरानी में संचालित होती हैं। जहां भी कभी कोई कमी पाई गई, वहां तुरंत जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं।
कंपनी ने स्पष्ट किया कि उनके द्वारा दी जाने वाली सभी वैल्यू-एडेड सेवाएं केवल ग्राहकों की सुविधा के लिए हैं। ये सेवाएं पूरी तरह वैकल्पिक हैं और किसी पर कोई दबाव नहीं है। कंपनी ने दावा किया कि वे किसी भी तरह के दबाव या गलत जानकारी देने की नीति को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करते हैं।
बता दें कि वीएफएस ग्लोबल दुनिया के 160 से अधिक देशों में अपनी सेवाएं दे रही है। कंपनी साल 2001 से अब तक करीब 50 करोड़ (आधे अरब) से अधिक वीजा आवेदनों को सफलतापूर्वक प्रोसेस कर चुकी है। लेकिन इस नई जांच ने कंपनी की साख पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
Author: Rajesh Kumar


