क्या भारत में भी जल्द चलेंगे प्लास्टिक के नोट? जानिए आरबीआई की बड़ी तैयारी और इन देशों का दिलचस्प इतिहास

Business News: भारतीय रिज़र्व बैंक देश में पारंपरिक कागज़ी नोटों की जगह प्लास्टिक या पॉलीमर के नोट लाने पर बहुत गंभीरता से विचार कर रहा है। हाल ही में पटना और मुंबई में हुई आरबीआई बोर्ड की उच्च स्तरीय बैठकों में इस बड़े प्रस्ताव पर गहन चर्चा हुई। केंद्रीय बैंक नोट छपाई की बढ़ती लागत को कम करना चाहता है।

ऑस्ट्रेलिया ने शुरू की थी सबसे पहले पॉलीमर करेंसी

पॉलीमर करेंसी तकनीक को दुनिया में सबसे पहले विकसित करने का श्रेय ऑस्ट्रेलिया को जाता है। ऑस्ट्रेलिया ने साल 1988 में अपने देश के द्विशताब्दी समारोह के दौरान पहली बार इन नए नोटों को जारी किया था। रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया ने खराब मौसम में नोटों को सुरक्षित रखने के लिए यह कदम उठाया था।

इन देशों ने कागज़ी नोटों को पूरी तरह हटाया

दुनिया के कई बड़े देशों ने अपनी पुरानी करेंसी व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। न्यूज़ीलैंड ने साल 1999 तक अपने सभी मूल्यवर्गों को पूरी तरह से पॉलीमर नोटों में बदल दिया था। इसी तरह रोमानिया, कनाडा और ब्रुनेई जैसे देश अब केवल टिकाऊ और सुरक्षित प्लास्टिक नोटों का ही इस्तेमाल कर रहे हैं।

ब्रिटेन और सिंगापुर में आंशिक रूप से होता है इस्तेमाल

कई विकसित देश अभी मिश्रित करेंसी प्रणाली पर काम कर रहे हैं। ब्रिटेन ने साल 2016 में सबसे पहले पांच पाउंड का पॉलीमर नोट जारी किया था। इसके बाद बड़े मूल्यवर्ग के नोट बदले गए। सिंगापुर और मलेशिया भी अपनी कुछ खास वैल्यू वाले नोटों के लिए इसी आधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हैं।

कागज़ी नोटों की उम्र बहुत कम होती है और उनके फटने का डर हमेशा बना रहता है। इसके विपरीत प्लास्टिक के नोट लंबे समय तक चलते हैं और इनकी नकल करना लगभग असंभव होता है। थाईलैंड और फ़िलिपींस जैसे एशियाई देश भी अब तेज़ी से इस बेहतरीन करेंसी बदलाव को अपना रहे हैं।

Author: Rajesh Kumar

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