Delhi News: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने रविवार को देश के युवाओं के बदलते तौर-तरीकों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि समाज सकारात्मक कार्यों को पर्याप्त जगह नहीं देगा, तो युवा भटक सकते हैं। इसके चलते वे सोशल मीडिया पर सक्रिय ‘कॉकरोच’ जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों का अनुसरण करने लगेंगे।
उपराष्ट्रपति ने सकारात्मक खबरों पर दिया विशेष जोर
एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने मुख्यधारा की मीडिया की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मीडिया को सकारात्मक खबरों को प्रमुखता से दिखाना चाहिए। सही संदेश समय पर पहुंचना जरूरी है, ताकि युवा देश की प्रगति में अपनी रुचि न खोएं और सही राह पर चलें।
सोशल मीडिया के ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पर निशाना
दरअसल उपराष्ट्रपति का यह तीखा बयान हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक व्यंग्यात्मक प्लेटफॉर्म ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संदर्भ में देखा जा रहा है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म ने देश के युवाओं के बीच बहुत कम समय में तेजी से लोकप्रियता हासिल कर ली है, जिससे नई बहस छिड़ गई है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्थायी प्रभाव का सवाल
राधाकृष्णन ने देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पूरा समर्थन किया। हालांकि उन्होंने गैर-जरूरी मुद्दों को मीडिया में अत्यधिक महत्व दिए जाने पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि जिन विषयों का समाज पर कोई स्थायी और रचनात्मक प्रभाव नहीं होता, उन्हें लगातार दिखाना देशहित में बिल्कुल नहीं है।
उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अचानक किसी चीज का हर जगह दिखने लगना उसकी दीर्घकालिक प्रामाणिकता साबित नहीं करता। लोग अच्छी चीजों की अहमियत कुछ समय बाद भी समझ जाते हैं। युवाओं को इस तरह के तात्कालिक और भ्रामक सोशल मीडिया ट्रेंड्स से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ विवाद
यह पूरा मामला पिछले सप्ताह भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक अदालती सुनवाई के दौरान शुरू हुआ था। वरिष्ठ वकीलों के दर्जे से जुड़ी इस सुनवाई की कथित टिप्पणियों को लेकर इंटरनेट पर बहस छिड़ गई थी। इसके बाद युवाओं ने बेरोजगारी और परीक्षा पेपर लीक जैसे मुद्दों को इससे जोड़ दिया।
युवाओं ने देश की शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के संकट पर तीखे मीम्स बनाकर इस प्लेटफॉर्म को हर जगह वायरल कर दिया था। हालांकि बाद में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्वयं इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनका बयान केवल फर्जी डिग्री लेकर वकालत में आने वाले लोगों के लिए था।
उपराष्ट्रपति ने अंत में कहा कि रचनात्मक रिपोर्टिंग समाज में एक नया भरोसा पैदा करती है। यह नागरिकों को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करती है। पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक उपलब्धियों, सामाजिक सेवा और मानवीय करुणा से जुड़ी सकारात्मक खबरें समाज में एक बड़ा और मजबूत बदलाव लाने का मुख्य माध्यम बनती हैं।
Author: Harikarishan Sharma


