West Bengal News: पश्चिम बंगाल में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित जानलेवा हमले के बाद सूबे की सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए दावा किया कि हेलमेट न होने की सूरत में अभिषेक की जान जा सकती थी।
ममता बनर्जी ने इस पूरी घटना के बाद पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर में सोची-समझी साजिश के तहत हमला किया गया। स्थानीय लड़कों ने समय पर हेलमेट न दिया होता, तो सिर में गंभीर चोट लगने से बड़ा हादसा हो जाता।
उन्होंने आरोप लगाया कि हमले के बाद अभिषेक बनर्जी का डॉक्टरों से सही ढंग से इलाज भी नहीं कराया गया। सरकारी मशीनरी ने उन्हें अस्पताल में तुरंत भर्ती करने से इनकार कर दिया। इसके कारण हमें घर पर ही आपातकालीन मेडिकल सेटअप तैयार करना पड़ा था।
गंभीर चोटों के बाद भी अस्पताल पर दबाव का आरोप
टीएमसी के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ ब्रायन ने पत्रकारों के सामने आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट साझा की। इस रिपोर्ट के मुताबिक अभिषेक बनर्जी की छाती के अंदर खून जम गया है। उनके पूरे शरीर, चेहरे, गले और पीठ पर गहरे जख्म के निशान उभरे हैं।
डेरेक ओ ब्रायन ने आरोप लगाया कि पुलिस के जरिए अपोलो अस्पताल पर मरीज को भर्ती न करने का भारी दबाव था। इस प्रशासनिक दखल के कारण डॉक्टरों को जरूरी निर्देश दिए जा रहे थे। सुरक्षा कारणों से हमें अभिषेक को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करना पड़ा।
फिलहाल अभिषेक बनर्जी को कड़ी सुरक्षा के बीच चिकित्सा निगरानी में रखा गया है। ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य में गुंडागर्दी और अमानवीयता लगातार बढ़ रही है। हमेशा के लिए कोई भी राजनेता सत्ता की कुर्सी पर काबिज नहीं रह सकता है।
बीजेपी ने आरोपों को नकारा और कानून व्यवस्था पर घेरा
अभिषेक बनर्जी ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए भारतीय जनता पार्टी को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि कम्युनिटी हॉल में सुबह से ही हमलावरों को छिपाकर रखा गया था। उन्होंने अपनी आंख, सीने और बांह पर गंभीर वार होने की बात कही।
दूसरी तरफ बीजेपी के केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने लोगों से कानून हाथ में न लेने की अपील की। मजूमदार ने कहा कि जनता के बीच टीएमसी को लेकर भारी आक्रोश फैल चुका है।
बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने भी कहा कि किसी को हिंसक विरोध की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। हालांकि उन्होंने टीएमसी को आत्मचिंतन करने की सलाह दी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 15 सालों के शासन में जनता इतनी आक्रोशित क्यों हो गई है?
संसद से सड़क तक विपक्षी दलों ने जताई तीखी नाराजगी
इस घटना पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर पोस्ट लिखकर इसे भारतीय लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया। राहुल ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों को कभी भी हिंसक रूप नहीं दिया जाना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी टीएमसी सांसद को पर्याप्त सुरक्षा न मिलने पर चिंता जाहिर की। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि संवेदनशील माहौल में भी पुलिस का न होना सवाल खड़े करता है।
यह हमला तब हुआ जब अभिषेक बनर्जी सोनारपुर में चुनाव बाद हुई हिंसा के पीड़ितों से मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान राज्य की सीआईडी ने फर्जी हस्ताक्षर के एक पुराने मामले में उनके घर जाकर सोमवार को पूछताछ के लिए समन भी थमा दिया है।
Author: Sourav Banerjee


