Karnataka News: कर्नाटक की राजनीति में इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। कांग्रेस आलाकमान ने सिद्दरमैया सरकार के तीन साल पूरे होने पर बड़ा फैसला किया है। पार्टी अब डीके शिवकुमार को राज्य के मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपने जा रही है।
कांग्रेस का यह बड़ा कदम भविष्य की राजनीतिक लड़ाइयों को ध्यान में रखकर उठाया गया है। पार्टी की नजरें साल 2028 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव और उसके बाद लोकसभा चुनाव पर टिकी हैं। पार्टी नेतृत्व इस बदलाव से नई ऊर्जा फूंकना चाहता है।
सिद्दरमैया से शिवकुमार को सत्ता का हस्तांतरण एक अनौपचारिक समझौते के तहत हो रहा है। मुख्यमंत्री के चयन के समय दोनों नेताओं के बीच शीर्ष पद के लिए कड़ी खींचतान हुई थी। तब आलाकमान ने दोनों को ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर मनाया था।
सत्ता विरोधी लहर को रोकने की बड़ी कवायद
सूत्रों के अनुसार यह बड़ा बदलाव बिल्कुल सही समय पर किया जा रहा है। कांग्रेस इस फैसले के जरिए राज्य में सत्ता-विरोधी लहर के असर को कम करना चाहती है। कर्नाटक में हर पांच साल बाद सरकार बदलने का एक पुराना इतिहास रहा है।
नेतृत्व परिवर्तन को लेकर लगातार चल रही अटकलों ने कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंचाया है। आम जनता के बीच सरकार की स्थिरता को लेकर सवाल उठ रहे थे। रणनीतिकार इसे उस राजनीतिक नुकसान की भरपाई के लिए बहुत जरूरी मान रहे हैं।
नए नेतृत्व से कांग्रेस को हैं ये तीन बड़ी उम्मीदें
हाईकमान को डीके शिवकुमार से तीन मुख्य मोर्चों पर बड़ी उम्मीदें हैं। पार्टी उनके जरिए शहरी मतदाताओं और युवाओं को अपने पाले में लाना चाहती है। इसके साथ ही प्रभावशाली वोक्कालिगा समुदाय को एकजुट करने की जिम्मेदारी भी शिवकुमार पर होगी।
रणनीतिकारों का मानना है कि शिवकुमार प्रशासन और शासन को लेकर एक नई सोच पैदा करेंगे। शिवकुमार उस मजबूत किसान समुदाय से आते हैं जो बेंगलुरु और पुराने मैसूर इलाकों में बसा है। वहां उनकी संगठन पर बहुत मजबूत और सीधी पकड़ मानी जाती है।
बीजेपी और जेडीएस के मजबूत गठबंधन ने पिछले लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को बड़ा नुकसान पहुंचाया था। जबकि एक साल पहले हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन शानदार रहा था। शिवकुमार की खास शैली शहरी वोटरों को पार्टी की तरफ दोबारा आकर्षित करेगी।
सिद्धारमैया की भविष्य की भूमिका पर टिकी नजरें
पार्टी का मानना है कि सिद्दरमैया के नेतृत्व में शुरू हुआ अहिंदा लामबंदी का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। मुख्यमंत्री द्वारा सत्ता का हस्तांतरण जिस सहजता से सुनिश्चित किया गया है, उससे आलाकमान राहत में है। हालांकि अंदरूनी कलह को लेकर सतर्कता बरती जा रही है।
कांग्रेस को पहले उम्मीद थी कि सिद्दरमैया केंद्र की राजनीति में सक्रिय होकर राज्यसभा जाएंगे। लेकिन उनका राज्य की राजनीति में बने रहना भी पार्टी के हित में ही माना जा रहा है। वे जमीनी स्तर पर पार्टी के सबसे लोकप्रिय पिछड़े वर्ग के नेता हैं।
भविष्य की चुनावी रणनीतियों की बात करें तो कांग्रेस अपने पुराने जनाधार को बचाना चाहती है। पार्टी नए सामाजिक वर्गों को अपने साथ जोड़कर वोटों के बिखराव को रोकेगी। डीके शिवकुमार का नया नेतृत्व इस पूरी योजना का मुख्य केंद्र बिंदु होगा।
Author: Suresh Gowda


