Moscow News: रूस ने मानव जीवन को लंबा करने के लक्ष्य के साथ एक महत्वाकांक्षी बायोमेडिकल कार्यक्रम पर बड़ा दांव लगाया है। करीब 26 अरब डॉलर की सरकारी सहायता से चल रही इस पहल में जीन थेरेपी, जेनोट्रांसप्लांटेशन, बायोप्रिंटिंग और पुनर्योजी चिकित्सा जैसी आधुनिक तकनीकों पर काम हो रहा है। वैज्ञानिकों का दावा है कि भविष्य में इंसानों की आयु को काफी बढ़ाया जा सकता है।
दीर्घायु मिशन पर रूस का बड़ा निवेश
रूसी सरकार के समर्थन से चल रही इस परियोजना का उद्देश्य उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करना और गंभीर बीमारियों से होने वाली मौतों को कम करना है। कार्यक्रम में नई जैव-प्रौद्योगिकियों के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी वजह से यह पहल वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
रूस समर्थित शोध में जीन थेरेपी, अंग पुनर्निर्माण, बायोप्रिंटिंग और क्रायोथेरेपी जैसी तकनीकों को शामिल किया गया है। इन तकनीकों का मकसद शरीर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं और अंगों को बेहतर तरीके से पुनर्जीवित करना है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे भविष्य में कई असाध्य रोगों के इलाज के नए रास्ते खुल सकते हैं।
मानव अंग विकसित करने पर विशेष फोकस
वैज्ञानिक जेनोट्रांसप्लांटेशन तकनीक पर भी तेजी से काम कर रहे हैं। इसके तहत आनुवंशिक रूप से संशोधित मिनी-पिग के अंदर प्रत्यारोपण योग्य मानव अंग विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इससे भविष्य में अंग प्रत्यारोपण की कमी जैसी बड़ी समस्या का समाधान निकल सकता है।
रूसी शोध दल ने दावा किया है कि वह मानव उपास्थि ऊतक और प्रयोगात्मक स्तर पर चूहे की कार्यशील थायरॉइड ग्रंथि का सफल बायोप्रिंटिंग मॉडल तैयार कर चुका है। वैज्ञानिक अब इस तकनीक को अगले चरण में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।
उम्र बढ़ने की प्रक्रिया रोकने पर रिसर्च
रूस के उप विज्ञान मंत्री डेनिस सेकिरिंस्की ने पहले कहा था कि जीन थेरेपी उम्र बढ़ने के खिलाफ लड़ाई का सबसे आशाजनक माध्यम बन सकती है। शोधकर्ता ऐसी दवाओं और उपचारों पर काम कर रहे हैं जो कोशिकाओं के बूढ़े होने की प्रक्रिया को धीमा कर सकें।
इस कार्यक्रम की शुरुआत 2024 में की गई थी। इसका प्रमुख लक्ष्य पुनर्योजी चिकित्सा और जीन आधारित उपचारों को नई ऊंचाई देना है। सरकारी अनुमानों के अनुसार, यह पहल भविष्य में बड़ी संख्या में लोगों के जीवन को बचाने में सहायक हो सकती है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
पुतिन की बेटी भी निभा रही अहम भूमिका
इस वैज्ञानिक अभियान के संचालन में रूस के प्रभावशाली वैज्ञानिक और नीति विशेषज्ञ शामिल हैं। इनमें एंडोक्रिनोलॉजिस्ट मारिया वोरोन्त्सोवा और भौतिक विज्ञानी मिखाइल कोवलचुक प्रमुख नाम हैं। मारिया वोरोन्त्सोवा को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बेटी माना जाता है और वे इस क्षेत्र से जुड़े कई शोध कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
कुर्चातोव संस्थान के प्रमुख मिखाइल कोवलचुक का कहना है कि विज्ञान तेजी से उस दिशा में बढ़ रहा है जहां मानव शरीर के क्षतिग्रस्त अंगों की मरम्मत और प्रतिस्थापन पहले से कहीं अधिक प्रभावी ढंग से संभव हो सकेगा। उनका मानना है कि चिकित्सा विज्ञान आने वाले वर्षों में कई नई संभावनाएं खोल सकता है।
रूसी वैज्ञानिकों का लक्ष्य इस दशक के अंत तक उन्नत अंग प्रत्यारोपण तकनीकों को विकसित करना है। इसी उद्देश्य से बायोप्रिंटिंग और जेनोट्रांसप्लांटेशन परियोजनाओं को तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है। यह पहल स्वास्थ्य विज्ञान के क्षेत्र में रूस की सबसे बड़ी परियोजनाओं में गिनी जा रही है।
Author: Pallavi Sharma


