New Delhi News: जब आप अपने पीएफ खाते से ऑनलाइन पैसा निकालने या ट्रांसफर करने के लिए आवेदन करते हैं, तो ईपीएफओ का सिस्टम सबसे पहले आपके यूएएन डेटा की तुलना आपके आधार और पैन कार्ड के डेटाबेस से करता है। अगर दोनों जगह आपके दस्तावेजों की स्पेलिंग या जन्मतिथि में थोड़ा भी अंतर मिलता है, तो सिस्टम सुरक्षा कारणों से आपके क्रेडेंशियल्स को सत्यापित नहीं कर पाता है। इस तकनीकी मिसमैच के कारण आपका ई-केवाईसी अधूरा रह जाता है।
नतीजा यह होता है कि आप चाहकर भी अपने ही पैसे को किसी आपातकाल में नहीं निकाल पाते और आपका क्लेम बार-बार रिजेक्ट होता रहता है। इस बड़ी समस्या से देश के लाखों नौकरीपेशा लोग अक्सर परेशान रहते हैं। सही जानकारी न होने के कारण लोग दफ्तरों के चक्कर काटते हैं।
ऑनलाइन सुधार करने का सबसे आसान और नया तरीका
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने इस समस्या को डिजिटल रूप से हल करने के लिए अपने मेंबर यूनिफाइड पोर्टल पर ‘जॉइंट डिक्लेरेशन’ की बेहतरीन ऑनलाइन सुविधा दी है। अपनी जानकारियों को पूरी तरह दुरुस्त करने के लिए आप नीचे दिए गए आसान डिजिटल स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं।
सबसे पहले ईपीएफओ के आधिकारिक मेंबर पोर्टल पर जाएं। वहां अपने 12 अंकों के यूएएन, पासवर्ड और कैप्चा कोड की मदद से अकाउंट लॉगइन करें। लॉगइन करने के बाद ऊपर दिए गए मेनू बार में ‘Manage’ टैब पर क्लिक करें। यहां आपको ‘Joint Declaration’ का विकल्प दिखाई देगा, उस पर तुरंत क्लिक करें।
अब स्क्रीन पर आपके पीएफ खाते की मौजूदा गलत डिटेल्स दिखाई देंगी। इसके ठीक बगल में आपको सही जानकारी भरने का कॉलम मिलेगा। वहां अपना सही नाम, जन्मतिथि और लिंग ध्यानपूर्वक दर्ज करें। सुधार के दावे को साबित करने के लिए आपको पैन कार्ड या जन्म प्रमाण पत्र की स्कैन कॉपी पीडीएफ फॉर्मेट में अपलोड करनी होगी।
सभी विवरण भरने और डॉक्यूमेंट अपलोड करने के बाद, आधार आधारित ओटीपी के जरिए अपने इस अनुरोध को सबमिट कर दें। ऑनलाइन रिक्वेस्ट सबमिट करने मात्र से ही आपके रिकॉर्ड में तुरंत सुधार नहीं होता है। आपके द्वारा भेजी गई यह रिक्वेस्ट सबसे पहले आपकी कंपनी के पास डिजिटल अप्रूवल के लिए जाती है।
कंपनी और ईपीएफओ की मंजूरी मिलना है बेहद जरूरी
आपकी कंपनी अपने रिकॉर्ड से आपके दस्तावेजों का मिलान करेगी और उसे आगे फॉरवर्ड करेगी। इसके बाद यह रिक्वेस्ट संबंधित ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय के पास जाएगी। ईपीएफओ अधिकारी दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच करने के बाद इसे अंतिम रूप से मंजूरी देते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर कुछ दिनों का समय लग सकता है।
यदि आपके पीएफ रिकॉर्ड और आधार की जन्मतिथि में 3 साल से ज्यादा का अंतर है, तो कई बार ऑनलाइन सिस्टम इसे स्वीकार नहीं करता है। ऐसी स्थिति में आपको ऑफलाइन ‘जॉइंट डिक्लेरेशन फॉर्म’ का सहारा लेना होगा। इस फॉर्म को ईपीएफओ की वेबसाइट से आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है।
इस फॉर्म में अपनी सही जानकारियां भरें और उस पर अपनी कंपनी के अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर और मुहर लगवाएं। इसके बाद इस फॉर्म को अपने जरूरी पहचान पत्रों जैसे पैन, पासपोर्ट या स्कूल सर्टिफिकेट की प्रतियों के साथ नजदीकी पीएफ कार्यालय में जाकर फिजिकल रूप से जमा करना होगा।
Author: Adv Anuradha Rajput


