Vikasnagar News: उत्तराखंड के विकासनगर उप-निबंधक कार्यालय में वर्षों से जारी रजिस्ट्री फर्जीवाड़े और स्टांप चोरी के बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए उप-निबंधक (सब-रजिस्ट्रार) अपूर्वा सिंह के निलंबन की संस्तुति शासन को भेज दी है। जिलाधिकारी द्वारा हाल ही में किए गए औचक निरीक्षण और शुरुआती जांच में गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं उजागर हुई हैं, जिसके बाद अब विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी भी तेज हो गई है।
जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिबंधित ‘गोल्डन फारेस्ट’ की जमीनों की लगभग 150 अवैध रजिस्ट्रियां मिली हैं। इसके साथ ही करोड़ों रुपये की स्टांप चोरी का मामला भी प्रकाश में आया है। जिलाधिकारी के निरीक्षण में पाया गया कि कार्यालय में वर्षों से मूल विलेख (Original Deeds) दबाकर रखे गए थे। इस पूरे प्रकरण को जिला प्रशासन अब एक बड़े राजस्व घोटाले और संगठित लापरवाही के रूप में देख रहा है, जिसमें कई अन्य लोगों की संलिप्तता की भी आशंका है।
2018 से डंप थे दस्तावेज, डीएम की छापेमारी में खुली भ्रष्टाचार की परतें
बता दें कि 4 मई को जिलाधिकारी सविन बंसल ने विकासनगर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में औचक छापेमारी की थी। निरीक्षण के दौरान रिकॉर्ड रूम और लंबित फाइलों की जांच में भारी गड़बड़ी पाई गई। कार्यालय में वर्ष 2018 से लेकर 2025 तक के सैकड़ों मूल विलेख पत्र डंप हालत में मिले, जिन्हें नियमानुसार पंजीकरण के बाद संबंधित पक्षों को सौंप दिया जाना चाहिए था। कई महत्वपूर्ण दस्तावेज तो ऐसे मिले जिन्हें पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद महीनों और वर्षों तक कार्यालय में ही रोक कर रखा गया था।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इन दस्तावेजों को रोकने के पीछे संदिग्ध मंशा और भ्रष्टाचार का खेल होने की प्रबल संभावना है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि सरकारी अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ और राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। इस कार्रवाई से जिले के अन्य सरकारी कार्यालयों में भी हड़कंप मच गया है। फिलहाल, शासन स्तर पर निलंबन की फाइल पहुंचते ही संबंधित सब-रजिस्ट्रार के विरुद्ध विभागीय जांच का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि घोटाले की पूरी गहराई का पता लगाया जा सके।

