गर्मी आते ही क्यों धधकने लगता है देश? विवेक विहार अग्निकांड ने खोल दी सुरक्षा की पोल, जानें मौत के डरावने आंकड़े

Delhi News: भारत में गर्मी का पारा चढ़ते ही आग लगने की घटनाओं में भयावह तेजी देखी जा रही है। विवेक विहार के हालिया अग्निकांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। एक चार मंजिला रिहायशी इमारत में लगी भीषण आग ने नौ मासूम जिंदगियों को लील लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों में बिजली के उपकरणों का अत्यधिक उपयोग और लापरवाही इन हादसों का सबसे बड़ा कारण है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़े इस जानलेवा खतरे की डरावनी सच्चाई बयां करते हैं।

बिजली के लोड और शॉर्ट सर्किट का जानलेवा कॉम्बिनेशन

गर्मियों के महीनों में घरों और दफ्तरों के भीतर एसी और फ्रिज जैसे भारी उपकरणों का उपयोग बढ़ जाता है। लगातार चलने के कारण बिजली के तारों पर दबाव बढ़ता है और वे ओवरहीट होने लगते हैं। पुराने बिजली सिस्टम और घटिया वायरिंग इस अतिरिक्त लोड को सहन नहीं कर पाते हैं। इसके परिणामस्वरूप शॉर्ट सर्किट होता है जो देखते ही देखते भयंकर आग में बदल जाता है। उचित मेंटेनेंस का अभाव अक्सर इन हादसों की मुख्य वजह बनकर उभरता है।

सूखा मौसम और ओवरहीटिंग बढ़ाते हैं आग का खतरा

भीषण गर्मी के दौरान हवा में नमी का स्तर काफी कम हो जाता है। सूखापन सूखी घास, कचरे के ढेर और पेड़ों को बेहद संवेदनशील बना देता है। एक छोटी सी चिंगारी भी ऐसे वातावरण में बड़ी तबाही ला सकती है। इसके अलावा, बिजली के ट्रांसफार्मर और एयर कंडीशनिंग यूनिट्स ऊंचे तापमान में काम करते हुए जल्दी ओवरहीट हो जाते हैं। वाहनों में ईंधन के गर्म होकर वाष्प बनने से भी आग लगने की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं।

हर साल हजारों लोगों की जान ले रहे अग्निकांड

एनसीआरबी (NCRB) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में आग लगने की घटनाओं से हर साल लगभग 12,000 से 27,000 लोगों की मौत होती है। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो देश में प्रतिदिन औसतन 35 से 60 लोग आग की भेंट चढ़ रहे हैं। इनमें से सबसे अधिक मौतें महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले राज्यों में दर्ज की गई हैं। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी नागरिकों की जान पर कितनी भारी पड़ रही है।

घरों के अंदर 70 फीसदी मौतें: लापरवाही का सबसे बड़ा केंद्र

चौंकाने वाली बात यह है कि आग से होने वाली कुल मौतों में से 70 प्रतिशत से अधिक घटनाएं रिहायशी इलाकों और रसोइयों में होती हैं। गैस सिलेंडर का फटना और ज्वलनशील पदार्थों को असुरक्षित तरीके से रखना इन हादसों को दावत देता है। इसके अलावा, आग के धुएं से होने वाला प्रदूषण दुनिया भर में हर साल 15 लाख लोगों की मौत का कारण बनता है। अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूकता और सख्त मानकों का पालन ही इन हादसों को रोकने का एकमात्र उपाय है।

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