हिमाचल के बागवानी क्षेत्र में बड़ा बदलाव, सीएम सुक्खू ने विवि को दी 34 करोड़ की सौगात

Himachal News: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रविवार को प्रदेश के बागवानी और वानिकी क्षेत्र को बड़ी मजबूती प्रदान की है। उन्होंने वर्चुअल माध्यम से डॉ. वाई.एस. परमार विश्वविद्यालय में 34.31 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस निवेश का प्राथमिक लक्ष्य राज्य में कृषि और बागवानी शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करना है। सरकार के इस कदम से आने वाले समय में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की संभावना है।

विश्वविद्यालय के शैक्षणिक ढांचे में होगा बड़ा सुधार

मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन नई परियोजनाओं से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और अनुसंधान क्षमताओं में व्यापक विस्तार होगा। इससे छात्रों को आधुनिक लैब और बेहतर क्लासरूम जैसी उन्नत सुविधाएं मिल सकेंगी। सरकार का मुख्य ध्यान कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों और वैज्ञानिक नवाचारों को शामिल करने पर है। इससे न केवल छात्रों का कौशल विकास होगा, बल्कि शोधकर्ता भी वैश्विक स्तर की चुनौतियों का समाधान स्थानीय स्तर पर खोजने में अधिक सक्षम और सफल हो पाएंगे।

कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का संकल्प

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट किया कि राज्य सरकार बागवानी क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर करती है, इसलिए सरकार इस क्षेत्र में लगातार निवेश कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को कृषि शिक्षा में बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए आधुनिक संसाधनों का निर्माण किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य खेती को पारंपरिक तरीकों से बाहर निकालकर तकनीकी रूप से उन्नत और अधिक मुनाफे वाला पेशा बनाना है।

किसानों और शोधकर्ताओं के लिए नई राहें

इन विकास कार्यों का सीधा लाभ केवल विश्वविद्यालय के छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्थानीय किसानों और वैज्ञानिकों को भी इसका फायदा मिलेगा। सीएम ने विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की कि वे उपलब्ध संसाधनों का भरपूर उपयोग नवाचार को प्रोत्साहित करने में करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि कृषि को टिकाऊ और लाभकारी बनाना सरकार की प्राथमिकता है। इन प्रयासों के माध्यम से राज्य न केवल खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा।

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