Muzaffarabad News: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में हालात लगातार बहुत अधिक तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस गंभीर अशांति के बीच जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी के शीर्ष नेता सरदार अमन खान ने भारत के साथ अच्छे संबंध बनाने की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने नई दिल्ली सरकार से तुरंत मानवीय मदद भेजने की गुहार लगाई है।
राशन और दवाओं की किल्लत से जूझ रही आम जनता
जेएएसी नेता ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की हिंसक कार्रवाई के बाद इस्लामाबाद ने इस पूरे क्षेत्र की आर्थिक नाकेबंदी कर दी है। इसके चलते स्थानीय नागरिकों को रोजमर्रा के खाने-पीने के राशन और जीवन रक्षक दवाओं की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो फुटेज में सरदार अमन खान को सीधे तौर पर भारत से सहायता मांगते हुए सुना गया। उन्होंने खुले मंच से कहा कि हमें इस संकट की घड़ी में भारत के सहयोग की सख्त जरूरत है क्योंकि यहां बहुत गंभीर मानवीय संकट पैदा हो चुका है।
लाइन ऑफ कंट्रोल खोलने के लिए पुंछ और डोडा में मांग
रावलकोट के ऐतिहासिक ईदगाह मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए खान ने पुंछ और डोडा सेक्टर में लाइन ऑफ कंट्रोल को खोलने की मांग की। उन्होंने भारी भीड़ से पूछा कि क्या उन्हें बॉर्डर की तरफ मार्च करना चाहिए, जिस पर जनता ने भी सहमति जताई।
पीओके में पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ पिछले कई हफ्तों से बड़े पैमाने पर उग्र विरोध-प्रदर्शन और रैलियां हो रही हैं। ईदगाह मैदान की विशाल रैली में स्थानीय लोगों ने पाकिस्तान से आजादी और संप्रभुता के नारे लगाए। यह प्रदर्शन अब सीधे तौर पर आजादी आंदोलन में बदल चुका है।
इस्लामाबाद ने जेएएसी को घोषित किया आतंकवादी संगठन
अंतरराष्ट्रीय मामलों के एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह राजनीतिक संकट स्थानीय जनता और इस्लामाबाद के रिमोट कंट्रोल से चलने वाले क्षेत्रीय प्रशासन के बीच गहरे अविश्वास को दर्शाता है। पाकिस्तानी सेना इस जमीनी स्तर के शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।
पाकिस्तानी प्रशासन ने बीती 5 जून को जेएएसी को गैर-कानूनी घोषित करते हुए इसे एक आतंकवादी संगठन करार दिया था। इसके बाद से ही इस पूरे क्षेत्र में हिंसा और तनाव चरम पर पहुंच गया। इस तानाशाही फैसले के कारण आम जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।
इंटरनेशनल सेंटर फॉर पीस स्टडीज की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद हमेशा मुख्यधारा की पाकिस्तानी पार्टियों के जरिए इस क्षेत्र पर अपना अवैध कब्जा बनाए रखता है। यहां के स्थानीय राजनीतिक दलों और स्वतंत्र संगठनों को दबाने के लिए लगातार सेना का सहारा लिया जाता है।

