Delhi News: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को मिली जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को कड़ी फटकार लगाई है। सुनवाई के दौरान केंद्रीय एजेंसी के ढुलमुल रवैये पर अदालत ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है।
स्थगन की मांग पर भड़के प्रधान न्यायाधीश
यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ा हुआ है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली विशेष पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पर तीखी टिप्पणी की। शीर्ष न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि पहले तो एजेंसी मामले को कोर्ट में लिस्ट कराने की जल्दबाजी दिखाती है और बाद में खुद ही सुनवाई टालने की मांग करने लगती है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहन की खंडपीठ ने कहा कि न्यायाधीश ऐसे महत्वपूर्ण मामलों की फाइलें रात-रात भर जागकर पढ़ते हैं। सुनवाई के दौरान ईडी ने अपने पक्ष को मजबूती से रखने के लिए अदालत से कुछ और समय मांगा था। इस टालमटोल की नीति पर कोर्ट ने कड़ा असंतोष व्यक्त किया।
अदालत ने आगे के लिए टाली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी को अदालतों में बार-बार तारीख आगे बढ़ाने की प्रवृत्ति पर एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, केंद्रीय जांच एजेंसी की मांग को देखते हुए शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई को कुछ समय के लिए आगे के लिए टाल दिया है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने इसी वर्ष जनवरी महीने में चैतन्य बघेल को नियमित जमानत दी थी। हाई कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की एकल पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा था कि चैतन्य बघेल न तो आबकारी विभाग में किसी आधिकारिक पद पर तैनात थे और न ही शराब कंपनियों में उनका कोई दखल था।
ईडी ने हाई कोर्ट के इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल कर चुनौती दी है। अब देखना होगा कि अगली सुनवाई में जांच एजेंसी अदालत के सामने क्या नए तथ्य पेश करती है। इस मामले पर पूरे राजनीतिक और प्रशासनिक अमले की नजरें टिकी हुई हैं।
Anjali Sahu


