हिमाचल सरकार के फैसले से पर्यटन निगम में मचा घमासान! निजी हाथों में जाएंगे 8 होटल, कर्मचारियों में भारी आक्रोश

Himachal News: हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (HPTDC) की मर्जी के बिना प्रदेश के 8 प्रमुख होटलों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी पूरी हो गई है। सरकार के इस चौंकाने वाले फैसले को चुनौती भी नहीं दी जा सकती। पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष आरएस बाली ने शिमला में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह बड़ा बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि निगम इन होटलों को निजी हाथों में देने के पक्ष में बिल्कुल नहीं था। हालांकि, सरकार ने मंत्रिमंडल की बैठक में इन घाटे में चल रहे होटलों को ‘ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस’ आधार पर निजी कंपनियों को देने का फैसला लिया है।

मरम्मत के लिए मांगा था बजट, मिला निजीकरण का आदेश

आरएस बाली ने बताया कि निगम ने सरकार से इन होटलों के जीर्णोद्धार के लिए आर्थिक मदद मांगी थी। लेकिन सरकार ने इन्हें खुद सुधारने के बजाय निजी क्षेत्र को सौंपना बेहतर समझा। निगम के कर्मचारियों ने भी इस फैसले का कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। बाली ने कहा कि वे निगम के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 2,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इससे आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संभव हो सकेंगी।

नगरोटा बगवां में बनेगा 180 करोड़ का आलीशान फाइव स्टार होटल

निगम के निदेशक मंडल की बैठक में कई बड़े प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दी गई है। धौलाधार की पहाड़ियों के नीचे नगरोटा बगवां में बनेर खड्ड के किनारे 180 करोड़ रुपये की लागत से एक फाइव स्टार होटल बनाया जाएगा। यह प्रोजेक्ट एशियन विकास बैंक (ADB) की मदद से पूरा होगा। इसका टेंडर 6 अप्रैल को फाइनल किया जाएगा, जो प्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा टेंडर होगा। इसके साथ ही शिमला के ऐतिहासिक होटल ‘हॉलिडे होम’ की मरम्मत पर 45 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके लिए केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है।

सौ करोड़ के पार पहुंचा पर्यटन निगम का टर्नओवर

आरएस बाली ने पिछले साढ़े तीन सालों की उपलब्धियां भी गिनाईं। उन्होंने बताया कि निगम ने 80 करोड़ के टर्नओवर से शुरुआत की थी, जो अब 100 करोड़ के पार पहुंच गया है। साल 2024-25 में यह आंकड़ा 107 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा है। हमीर होटल के लिए 20 करोड़ और होटल ज्वालाजी की मरम्मत के लिए 35 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। मरम्मत के दौरान अगर होटल बंद रहते हैं, तो कर्मचारियों के वेतन और खर्चों का भुगतान उसी फंड से किया जाएगा।

होटलों की मनमानी पर अब उडन दस्तों की नजर

पर्यटन निगम अब अपने होटलों की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए सख्त कदम उठा रहा है। होटलों की निगरानी के लिए विशेष ‘उड़न दस्तों’ का गठन किया जाएगा। ये दस्ते कमरों की बुकिंग और अन्य कार्यों की औचक जांच करेंगे। इसके अलावा, पर्यटकों की सुविधा के लिए 24 घंटे सातों दिन चलने वाला एक अत्याधुनिक कॉल सेंटर भी बनाया जा रहा है। इससे पर्यटकों की शिकायतों और बुकिंग की समस्याओं का तुरंत समाधान हो सकेगा।

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