Sports News: भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रगनानंद ने प्रतिष्ठित नार्वे शतरंज का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। इस ऐतिहासिक जीत के बाद उन्होंने खास बातचीत में कहा कि यह भारतीय शतरंज के लिए सबसे रोमांचक समय है। भारतीय खिलाड़ी दुनिया में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं।
करियर का सबसे बड़ा और खास खिताब
प्रगनानंद ने इस शानदार उपलब्धि को अपने अब तक के करियर का सबसे विशेष पल और सबसे बड़ा खिताब बताया है। उन्होंने कहा कि नार्वे शतरंज दुनिया के सबसे मजबूत और कठिन टूर्नामेंटों में से एक माना जाता है। इस बार प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों का स्तर बहुत ऊंचा था।
शुरुआती दौर में खराब शुरुआत के बावजूद प्रगनानंद ने गजब की वापसी की। उन्होंने अंतिम चरणों में लगातार चार मुकाबले जीतकर पहला स्थान हासिल किया। निर्णायक मुकाबले में विसेंट कीमर को हराने के बाद उन्होंने राहत की सांस ली। यह पूरा टूर्नामेंट उनके लिए मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।
कार्लसन को दो बार हराना बेहद खास
टूर्नामेंट के दौरान प्रगनानंद ने दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को दो बार शिकस्त दी। महान खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद के बाद वह ऐसा करने वाले दूसरे भारतीय बने हैं। प्रगनानंद ने कहा कि मैग्नस को हराना हमेशा खास होता है क्योंकि वह कई वर्षों से सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहे हैं।
कार्लसन के खिलाफ खेलने की चुनौती पर उन्होंने बताया कि वह खेल के दौरान लगातार नई मुश्किलें खड़ी करते हैं। बराबरी की स्थिति में भी वह जीत का मौका ढूंढ लेते हैं। इसलिए उनके खिलाफ पहली चाल से लेकर आखिरी चाल तक खिलाड़ी को पूरी तरह सतर्क रहना पड़ता है।
भारतीय शतरंज का चल रहा बेहतरीन दौर
दिग्गज विश्वनाथन आनंद के प्रभाव पर प्रगनानंद ने कहा कि आनंद सर पूरे देश के खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। उनकी खेल की गहरी समझ और मार्गदर्शन से युवा पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने को मिला है। वह हर कदम पर युवा खिलाड़ियों का पूरा सहयोग करते हैं।
आज भारत के पास प्रगनानंद, गुकेश और अर्जुन एरिगैसी जैसे शानदार खिलाड़ी हैं। प्रगनानंद इस आपसी प्रतिस्पर्धा को बेहद स्वस्थ और सकारात्मक मानते हैं। उन्होंने कहा कि साथियों की सफलता उन्हें और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है। मौजूदा समय में भारतीय शतरंज बेहद मजबूत स्थिति में है।
Author: Prem Sharma


