Uttar Pradesh News: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान का बिगुल फूंक दिया है। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने घोषणा की है कि अब प्रदेशवासियों को विदेश जाने के बजाय अपने राज्य की सांस्कृतिक विरासत देखने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके तहत पर्यटन विभाग के ‘राही’ पर्यटक आवासों में ठहरने पर 25 प्रतिशत तक की बड़ी रियायत दी जाएगी। साथ ही, अगले दो महीनों तक सभी सरकारी संग्रहालयों में पर्यटकों का प्रवेश पूरी तरह नि:शुल्क रहेगा।
प्रमुख शहरों के लिए तैयार होंगे स्पेशल टूर पैकेज
पर्यटन मंत्री ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को एक बड़े अवसर के रूप में देखा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वाराणसी, अयोध्या, मथुरा, प्रयागराज और आगरा जैसे प्रमुख केंद्रों के लिए आकर्षक टूर पैकेज तैयार किए जाएं। इसके लिए विभाग निजी टूर ऑपरेटर्स के साथ मिलकर काम करेगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य लोगों को उत्तर प्रदेश की समृद्ध धार्मिक, प्राकृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों से जोड़ना है। विभाग रेस्टोरेंट एसोसिएशन से भी बात कर रहा है ताकि खान-पान की सेवाओं पर भी पर्यटकों को विशेष छूट मिल सके।
डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए हेरिटेज साइट्स पहली पसंद
उत्तर प्रदेश के किलों, हेरिटेज संपत्तियों और ईको-टूरिज्म साइट्स को अब डेस्टिनेशन वेडिंग के रूप में वैश्विक स्तर पर प्रचारित किया जाएगा। मंत्री ने अपील की है कि वेडिंग प्लानर और परिवार अपने आयोजनों के लिए प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत को प्राथमिकता दें। विभाग इन स्थलों पर विश्वस्तरीय सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएगा। इससे न केवल स्थानीय रोजगार बढ़ेगा, बल्कि प्रदेश की ऐतिहासिक इमारतों का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा। सरकार का मानना है कि इससे यूपी पर्यटन के क्षेत्र में एक नया हब बनकर उभरेगा।
खर्च कम करने के लिए कड़े प्रशासनिक निर्देश
पर्यटन निदेशालय में आयोजित बैठक के दौरान प्रशासनिक खर्चों में कटौती पर भी विशेष जोर दिया गया। मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को सरकारी वाहनों का उपयोग न्यूनतम करने और ‘कारपूलिंग’ अपनाने का निर्देश दिया है। विभागीय बेड़े में गाड़ियों की संख्या भी कम की जाएगी ताकि वित्तीय बोझ को कम किया जा सके। अपर मुख्य सचिव पर्यटन अमृत अभिजात ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय अधिकारी बिना पूर्व अनुमति के मुख्यालय न आएं। बैठकों के लिए अब डिजिटल माध्यमों और वर्चुअल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का अधिकतम उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है।


