हिमाचल पंचायत चुनाव: सुक्खू सरकार का बड़ा दांव, अब DC तय करेंगे किसका कटेगा टिकट और किसे मिलेगा मौका?

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों की बिसात बिछनी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने जमीनी स्तर की राजनीति में एक ऐसा बदलाव किया है, जो आने वाले समय में चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है। राज्य सरकार ने ‘हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (चुनाव) संशोधन नियम, 2026’ को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। इस नए कानून के तहत जिलों के उपायुक्तों यानी डीसी (DC) को अभूतपूर्व शक्तियां दी गई हैं। अब प्रशासन के पास यह अधिकार होगा कि वह विशेष परिस्थितियों में आरक्षण के तय रोस्टर में फेरबदल कर सके। यह कदम प्रशासनिक सुगमता के नाम पर उठाया गया है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने गहरे हैं।

आपत्तियों के बाद जागी सरकार, जारी हुई नई अधिसूचना

पंचायती राज विभाग ने 30 मार्च 2026 को इस संबंध में अंतिम अधिसूचना जारी की। दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने अपनी पिछली गलती को स्वीकार किया है। अधिसूचना में साफ कहा गया है कि 23 मार्च को जब इन नियमों का मसौदा रखा गया था, तब जनता की आपत्तियों पर ‘भूलवश’ विचार नहीं हो पाया था। अब सरकार का दावा है कि उसने सभी सुझावों और शिकायतों का गहन अध्ययन करने के बाद ही इन संशोधित नियमों को अंतिम रूप दिया है। यह संशोधन मुख्य रूप से उन व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने के लिए है, जो अक्सर चुनावी प्रक्रिया के दौरान रोस्टर लागू करते समय सामने आती हैं।

95 फीसदी नियम वही, 5 फीसदी पर डीसी का ‘विशेषाधिकार’

नए प्रावधानों के गणित को समझना जरूरी है। प्रदेश की 95 प्रतिशत पंचायतों में आरक्षण पहले से निर्धारित पुराने नियमों और चक्राणुक्रम (Rotation) के आधार पर ही चलेगा। असली खेल बाकी बची 5 प्रतिशत सीटों पर है। इन सीटों के लिए उपायुक्तों को ‘डिस्क्रिशनरी पावर’ यानी विशेषाधिकार दिया गया है। डीसी अब अपने विवेक का इस्तेमाल कर इन सीटों के आरक्षण रोस्टर में बदलाव कर सकेंगे। सरकार का तर्क है कि इससे उन क्षेत्रों में न्याय हो सकेगा जहां जनसंख्या का गणित या भौगोलिक स्थिति सामान्य नियमों में फिट नहीं बैठती।

इन तीन प्रमुख पदों पर बदलेगा चुनावी समीकरण

सचिव पंचायती राज द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, डीसी की यह शक्ति तीन स्तरों पर प्रभावी होगी:

  • पंचायत सदस्य: नियम 28 में बदलाव के बाद, डीसी किसी एक पंचायत में कुल सीटों के 5 प्रतिशत तक के रोस्टर को बदल सकते हैं।
  • पंचायत प्रधान: नियम 87 के तहत, अब एक विकास खंड (ब्लॉक) में ग्राम पंचायत प्रधानों के कुल पदों के 5 प्रतिशत तक के आरक्षण में फेरबदल संभव होगा।
  • पंचायत समिति अध्यक्ष: नियम 88 में संशोधन कर डीसी को जिले में पंचायत समिति अध्यक्षों के पदों में भी 5 प्रतिशत तक बदलाव का अधिकार दे दिया गया है।

कठिन भूगोल या राजनीतिक बिसात?

सरकार ने इस बड़े फैसले के पीछे हिमाचल की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला दिया है। अधिसूचना में ‘Geographical and other peculiar conditions’ शब्द का प्रयोग किया गया है। सरकारी पक्ष का कहना है कि ऊंचे पहाड़ी इलाकों और विषम परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में पुराने रोस्टर को सख्ती से लागू करना मुश्किल हो रहा था। प्रशासन को फील्ड में आने वाली इन्हीं व्यावहारिक समस्याओं से बचाने के लिए नियमों में यह लचीलापन लाया गया है। हालांकि, चुनाव से ठीक पहले अफसरों को मिली यह ताकत चर्चा का विषय बनी हुई है।

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