Shimla News: हिमाचल प्रदेश के चीफ मिनिस्टर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्टेट को सेफ बनाने के लिए एक बड़ा अनाउंसमेंट किया है। उन्होंने बताया कि राज्य में नेचुरल डिजास्टर से होने वाले डैमेज को रोकने के लिए लगभग पैंतीस सौ करोड़ रुपये का एक मेगा बजट खर्च किया जाएगा। इससे पूरे प्रदेश में एक हाईटेक डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा।
हिप्पा संस्थान में आयोजित हाई लेवल वर्कशॉप को किया संबोधित
चीफ मिनिस्टर शुक्रवार को शिमला में सिचुएटेड डॉ. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (हिप्पा) में बोल रहे थे। वह यहां आयोजित ‘टूवार्डस रेजिलिएंस इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग इन हिमालय’ सब्जेक्ट पर एक हाई लेवल वर्कशॉप के क्लोजिंग सेरेमनी प्रोग्राम को एड्रेस कर रहे थे। उन्होंने माउंटेन रीजंस के लिए बेहतर प्लानिंग पर जोर दिया।
सीएम ने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपनी जियोग्राफिकल लोकेशन की वजह से बहुत ही सेंसिटिव स्टेट है। यहां लैंडस्लाइड और क्लाउडबर्स्ट जैसी नेचुरल कैलामिटीज का खतरा हमेशा बना रहता है। उन्होंने साल दो हजार तेईस की भयंकर तबाही को याद किया, जब मानसून सीजन में अचानक बहुत विकट परिस्थितियां खड़ी हो गई थीं।
उस क्रिटिकल टाइम में लगभग पचहत्तर हजार डोमेस्टिक और इंटरनेशनल टूरिस्ट्स स्टेट के अलग-अलग टूरिस्ट स्पॉट्स में फंस गए थे। लेकिन गवर्नमेंट, कैबिनेट मिनिस्टर्स और लोकल एडमिनिस्ट्रेशन की मुस्तैद टीमों ने एक जॉइंट रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। सभी फंसे हुए लोगों को सेफली बाहर निकाला गया और एसेंशियल सर्विसेज को तुरंत री-स्टार्ट किया गया।
चंद्रताल झील में फंसे पर्यटकों को बचाने वाले मंत्रियों की सराहना
मुख्यमंत्री ने रेवेन्यू मिनिस्टर जगत सिंह नेगी और एमएलए संजय अवस्थी के जज्बे की खुलकर तारीफ की। इन दोनों लीडर्स ने स्वयं चंद्रताल लेक एरिया में जाकर माइनस डिग्री टेम्परेचर के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन लीड किया था। उन्होंने वहां बर्फीले मौसम में फंसे तीन सौ टूरिस्ट्स की जान बचाकर बहुत ही कमेंडेबल काम किया था।
प्रोग्राम के दौरान चीफ मिनिस्टर ने हाइड्रो मेट्रोलॉजिकल डिजास्टर से जुड़ी एक इंपॉर्टेंट रिसर्च रिपोर्ट का ऑफिशियल विमोचन भी किया। इसके साथ ही उन्होंने डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए एक नया ऑनलाइन ‘हिमाचल सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट मैनेजमेंट सिस्टम’ यानी एसआईएयू पोर्टल भी सक्सेसफुली लॉन्च किया।
डेटा बेस्ड डिसीजन मेकिंग के लिए लॉन्च हुआ नया एसआईएयू पोर्टल
यह मॉडर्न पोर्टल स्टेट के विभिन्न सरकारी डिपार्टमेंट्स के बीच आपसी कोऑर्डिनेशन बढ़ाने में बहुत हेल्पफुल होगा। इससे एडमिनिस्ट्रेटिव वर्क्स ज्यादा इफेक्टिव होंगे और डेटा बेस्ड डिसीजन मेकिंग प्रोसेस को मजबूती मिलेगी। अब किसी भी प्रोजेक्ट का सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट बहुत ही ट्रांसपेरेंट और फास्ट तरीके से ऑनलाइन मॉनिटर किया जा सकेगा।
स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के वाइस चेयरमैन दीपक राठौर ने भी इस वर्कशॉप में अपने व्यूज शेयर किए। उन्होंने कहा कि वेस्टर्न हिमालय का एनवायरनमेंट पिछले कुछ सालों में तेजी से चेंज हुआ है। ग्लोबल वार्मिंग के चलते यहां अचानक आने वाले फ्लड और एवलांच जैसी घटनाएं काफी ज्यादा बढ़ गई हैं।
उपाध्यक्ष ने पहाड़ों के लिए एक मजबूत अर्ली वार्निंग सिस्टम और माउंटेन इंजीनियरिंग स्टैंडर्ड्स तय करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि खतरनाक ग्लेशियर लेक्स की सैटेलाइट से रेगुलर मॉनिटरिंग बहुत जरूरी है। इसके साथ ही लोकल पब्लिक में अवेयरनेस कैंपेन चलाकर आपदा के समय होने वाले जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

