Shimla News: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि क्लाइमेट चेंज और बड़े बांधों के जलाशयों से बढ़ता इवैपोरेशन ही राज्य में क्लाउडबर्स्ट यानी बादल फटने की घटनाओं का मुख्य कारण है। इस खतरे से निपटने के लिए सरकार बड़े पैमाने पर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए सरकार अब 3,500 करोड़ रुपए का भारी निवेश करेगी। इस पूरे फंड से राज्य में डिजास्टर-रेसिस्टेंट इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से निर्माण किया जाएगा ताकि भविष्य में नुकसान को काफी कम किया जा सके।
हिमाचल में आपदा प्रबंधन के लिए नया इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान
पश्चिमी हिमालय में डिजास्टर-रेसिस्टेंट इंफ्रास्ट्रक्चर पर आयोजित एक विशेष वर्कशॉप के क्लोजिंग सेशन में सीएम सुक्खू बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हिमाचल एक पहाड़ी राज्य है। यहां की कठिन जियोग्राफिकल कंडीशंस के कारण यह क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील हो गया है, जिसे गंभीरता से लेना जरूरी है।
सीएम ने साल 2023 की भयंकर तबाही को भी याद किया। उन्होंने बताया कि उस समय राज्य के विभिन्न हिस्सों में लगभग 75,000 टूरिस्ट्स फंस गए थे। सरकार ने बेहतर कोऑर्डिनेशन के जरिए सभी फंसे हुए टूरिस्ट्स का सुरक्षित रेस्क्यू किया। प्रशासन ने पूरी ताकत झोंककर आवश्यक सर्विसेज को युद्धस्तर पर रीस्टोर किया था।
इस संकट के दौरान मुख्यमंत्री ने मंत्रियों के जमीनी प्रयासों की खुलकर सराहना की। उन्होंने रेवेन्यू मिनिस्टर जगत सिंह नेगी और विधायक संजय अवस्थी के काम को सराहा। इन दोनों लीडर्स ने खुद चंद्रताल झील के बेहद दुर्गम इलाके में जाकर करीब 300 फंसे हुए पर्यटकों को बचाने के रेस्क्यू ऑपरेशन को लीड किया था।
राहत नीति में बड़ा बदलाव और पीड़ितों को मुआवजा
मुख्यमंत्री ने 2023 के भारी नुकसान के आंकड़े भी सामने रखे। उस आपदा में लगभग 23,000 घर पूरी तरह तबाह हो गए थे और 51 लोगों की मौत हुई थी। प्रभावित परिवारों की मदद के लिए सरकार ने अपनी रिलीफ पॉलिसी में ऐतिहासिक बदलाव किया। पूरी तरह डैमेज घरों का मुआवजा 1.30 लाख से बढ़ाकर 8 लाख रुपए किया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि साल 2023 के मुश्किल अनुभवों से सरकार ने बहुत बड़ा सबक सीखा है। इसी का परिणाम था कि साल 2025 की आपदा के समय प्रशासन ने बहुत इफेक्टिव रिस्पांस दिया। हालात काफी गंभीर होने के बावजूद इस बार राज्य में जान-माल का नुकसान बहुत कम देखने को मिला।
हिमाचल प्रदेश इस समय क्लाइमेट चेंज की सबसे गंभीर चुनौती का सीधा सामना कर रहा है। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि आने वाले सालों में देश के दूसरे राज्यों को भी ऐसे ही बुरे इफेक्ट्स का सामना करना पड़ सकता है। इन बड़े खतरों से निपटने के लिए अब सख्त पॉलिसी डिसीजन्स लेने का समय आ गया है।
सीएम सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार जनहित में कड़े फैसले लेने के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं, मुख्य सचिव केके पंत ने भी वर्कशॉप में चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग एक बहुत बड़ा चैलेंज है। 2023 और 2025 की त्रासदियों ने हमारे पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचाया है।

