Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के ट्रांसफर को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। उद्योग विभाग के माइनिंग विंग में ट्रांसफर की पुरानी प्रोसेस में बहुत बड़ा चेंज किया गया है। अब स्टाफ के तबादले और नई नियुक्तियां केवल हेडक्वार्टर लेवल से ही तय की जाएंगी।
डायरेक्टरेट लेवल से जारी होंगे माइनिंग स्टाफ के ट्रांसफर ऑर्डर्स
स्टेट गवर्नमेंट के न्यू नोटिफिकेशन के मुताबिक माइनिंग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट माइनिंग इंस्पेक्टर और माइनिंग गार्ड्स की पोस्टिंग के फैसले अब सीधे डायरेक्टरेट लेवल से लिए जाएंगे। इन सभी कर्मचारियों का ट्रांसफर एक माइनिंग ऑफिस से दूसरे ऑफिस या जियोलॉजिकल विंग में केवल हेड ऑफिस की मंजूरी के बाद ही पॉसिबल होगा।
प्रशासन ने साफ किया है कि ये नए अपॉइंटमेंट्स केवल सेंक्शंड खाली पोस्ट्स के अगेंस्ट ही किए जा सकते हैं। नई ऑफिशियल ट्रांसफर पॉलिसी के तहत किसी भी एम्प्लॉई का वर्किंग टेन्योर उसी पर्टिकुलर स्टेशन से माना जाएगा, जहां वह एक सेंक्शंड पोस्ट पर रेगुलर बेसिस पर अपनी ड्यूटी दे रहा है।
इंटरनल फील्ड पोस्टिंग को अब नहीं माना जाएगा ऑफिशियल ट्रांसफर
अगर किसी ऑफिशियल को उसी माइनिंग ऑफिस के जूरिडिक्शन में अवैध खनन की चेकिंग या एडमिनिस्ट्रेटिव रीजंस से किसी दूसरे एरिया में भेजा जाता है, तो उसे सिर्फ इंटरनल फील्ड पोस्टिंग माना जाएगा। डिपार्टमेंट इसे रेगुलर ट्रांसफर काउंट नहीं करेगा। इस बड़े बदलाव से एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम में काफी सुधार होगा।
इंडस्ट्री डिपार्टमेंट के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी आरडी नजीम ने इस नए सिस्टम की ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी कर दी है। इस पूरे फेरबदल का मेन मोटिव ट्रांसफर प्रोसेस को ज्यादा ट्रांसपेरेंट बनाना है। इससे एडमिनिस्ट्रेटिव प्रॉब्लम्स कम होंगी और किसी भी तरह के लीगल डिस्प्यूट्स या अदालती मामलों से बचा जा सकेगा।

