यूपी में ड्रिप सिंचाई से गन्ना क्रांति: 9 साल में 73 हजार हेक्टेयर पर जल बचत, उत्पादन में 25% का इजाफा

Uttar Pradesh News: योगी आदित्यनाथ सरकार के 9 साल के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों ने तकनीक का शक्तिशाली लाभ देखा है। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने ड्रिप इरीगेशन सिंचाई पद्धति को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया। इसके परिणामस्वरूप किसानों को उत्पादन में 25 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी हासिल हुई है। इस दौरान एथनॉल उत्पादन क्षमता भी तीन गुना तक बढ़ चुकी है।

73 हजार हेक्टेयर में ड्रिप संयंत्र हुए स्थापित

गन्ना विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले 9 वर्षों में बदलाव की बयार स्पष्ट दिखी। प्रदेश में अब तक 73,078 हेक्टेयर विशाल गन्ना क्षेत्र को ड्रिप इरीगेशन के दायरे में लाया जा चुका है। जो भी किसान इस आधुनिक संयंत्र का सफलतापूर्वक उपयोग कर रहे हैं, वहां गन्ने का उत्पादन सुनिश्चित तौर पर 25 प्रतिशत तक उछल गया है।

बूंद-बूंद से सिंचाई, 50 प्रतिशत जल की बचत

ड्रिप इरीगेशन विधि में फसलों को बूंद-बूंद करके पानी पहुंचाया जाता है। यह तकनीक पारंपरिक बाढ़ सिंचाई के मुकाबले करीब 50 प्रतिशत तक पानी बचाने में सक्षम साबित हुई है। भूजल के अंधाधुंध दोहन को रोकने में यह बहुत कारगर है। इसी तर्ज पर लगभग 50 प्रतिशत तक उर्वरकों की खपत भी कम हो गई है। इससे किसानों की जेब से होने वाला अतिरिक्त खर्च सीधे तौर पर रुक रहा है।

खर्च का बोझ घटा, किसानों की आय बढ़ी

इस तकनीक में पानी में उर्वरकों को आसानी से घोलकर सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। पानी और रासायनिक खाद की बर्बादी रुकने से खेती की लागत में बड़ी गिरावट आई है। उत्पादन बढ़ने और लागत कम होने के दोहरे लाभ ने किसानों की वास्तविक क्रय शक्ति को मजबूत किया है। विभाग इसे ही कृषक आय वृद्धि का मूल आधार मान रहा है।

क्षारयुक्त और सूखी जमीन पर भी लहलहा रही फसल

ड्रिप इरीगेशन की सबसे बड़ी सफलता बंजर पड़ी जमीनों पर नई हरियाली के रूप में दिखी है। उत्तर प्रदेश के क्षारयुक्त इलाके और बेहद कम बारिश वाले क्षेत्र भी अब गन्ने की पैदावार के लिए उपयुक्त बन गए हैं। इस अनोखी सफलता को देखते हुए बीते वर्षों में ड्रिप संयंत्र अपनाने वाले काश्तकारों की तादाद निरंतर रफ्तार से बढ़ रही है।

9 साल में तीन गुना हुई एथनॉल उत्पादन क्षमता

गन्ना किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए हरित ईंधन पर विशेष जोर दिया गया है। साल 2017 तक उत्तर प्रदेश में मात्र 37 चीनी मिलों के पास ही एथनॉल प्लांट उपलब्ध थे। उस समय कुल वार्षिक क्षमता 88 करोड़ लीटर थी, लेकिन वास्तविक उत्पादन महज 42 करोड़ लीटर ही हो पाता था। आज हालात बिल्कुल बदल चुके हैं।

53 चीनी मिलें अब पैदा कर रही हैं ग्रीन एनर्जी

वर्तमान आंकड़ों पर गौर करें तो 53 चीनी मिलों में एथनॉल उत्पादन की क्षमता को छलांग लगाकर 258 करोड़ लीटर सालाना तक पहुंचा दिया गया है। शुगर सेक्टर में अब एथनॉल का रिकॉर्ड उत्पादन 137 करोड़ लीटर को पार कर चुका है। यह विस्तार चीनी मिलों को मजबूती देने के साथ-साथ किसानों के गन्ना मूल्य भुगतान की गारंटी बन रहा है। विभाग इस पूरे इकोसिस्टम को किसान हित का सबसे सफल मॉडल बता रहा है।

Join our WhatsApp Channel and Get all Latest News Updates

Hot this week

Related Articles

Popular Categories