स्मार्ट लॉक या ‘डेथ ट्रैप’? विवेक विहार अग्निकांड में 9 मौतों के बाद उठा बड़ा सवाल, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती?

Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली के विवेक विहार इलाके में एक रिहायशी इमारत में लगी भीषण आग ने सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक हादसे में करीब 9 लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी है। शुरुआती जांच में आग लगने का कारण एसी ब्लास्ट या शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाला खुलासा स्मार्ट डोर लॉक को लेकर हुआ है। जिस फ्लोर पर आग लगी, वहां लगा आधुनिक स्मार्ट लॉक ही लोगों की मौत का मुख्य कारण बन गया।

आग के बीच मौत का फंदा बना हाई-टेक स्मार्ट लॉक

सुरक्षा के लिए लगाया गया इलेक्ट्रॉनिक स्मार्ट डोर लॉक आपात स्थिति में ‘विलेन’ साबित हुआ। जैसे ही इमारत में आग फैली, तकनीकी खराबी के कारण यह लॉक पूरी तरह जाम हो गया। अंदर फंसे लोगों ने दरवाजा तोड़ने की काफी कोशिश की, लेकिन सिस्टम ने कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया। इसके चलते लोग बाहर नहीं निकल पाए और धुएं के बीच बेहोश होकर जान गंवा बैठे। यह हादसा सिखाता है कि केवल तकनीक के भरोसे रहना कितना घातक हो सकता है।

इमारत की बनावट और कमियों ने भी बढ़ाया खतरा

स्मार्ट लॉक के अलावा इमारत में सुरक्षा के अन्य उपायों की भी भारी कमी थी। खिड़कियों में लगी मजबूत लोहे की ग्रिल के कारण लोग बाहर कूदने में नाकाम रहे। इमारत की छत का दरवाजा भी बंद पाया गया, जिससे बचाव का आखिरी रास्ता भी बंद हो गया। पूरी बिल्डिंग में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही रास्ता था। आग और धुएं ने कुछ ही मिनटों में पूरी जगह को अपनी चपेट में ले लिया था।

क्या है स्मार्ट लॉक और क्यों यह आपातकाल में है फेल?

आजकल फिंगरप्रिंट, ऐप और पिन कोड से चलने वाले स्मार्ट लॉक्स का चलन काफी बढ़ गया है। लोग इन्हें चोरी से बचने और आधुनिक दिखने के लिए लगवा रहे हैं। अक्सर बिजली या बैटरी फेल होने पर ये लॉक काम करना बंद कर देते हैं। हालांकि कई मॉडल्स में मैनुअल ओवरराइड की सुविधा होती है, लेकिन घबराहट में लोग इसे ढूंढ नहीं पाते। तकनीक की यह जटिलता ही संकट के समय इंसानी जान पर भारी पड़ रही है।

भविष्य में सुरक्षा के लिए इन बातों का रखें विशेष ध्यान

तकनीक पर पूरी तरह निर्भरता जानलेवा हो सकती है, इसलिए स्मार्ट लॉक के साथ पारंपरिक चाबी का विकल्प भी जरूर रखें। किसी भी इमारत में कम से कम दो एग्जिट गेट और धुआं रहित सीढ़ियां होना अनिवार्य है। खिड़कियों पर ऐसी ग्रिल न लगवाएं जिन्हें आपात स्थिति में हटाया न जा सके। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर फायर ऑडिट और तकनीक की जांच करना ही बचाव का एकमात्र रास्ता है।

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