प्राइवेट स्कूलों की लूट का खुलासा! किताब और यूनिफॉर्म के नाम पर पैरेंट्स की जेब काटने वालों पर अब शिकंजा

India News: देश में प्राइवेट स्कूलों का एक संगठित लूट नेटवर्क सामने आया है। DNA अभियान ने महंगी किताबों के नाम पर अभिभावकों से हो रही ठगी का पर्दाफाश किया था। इसके बाद देशभर से जबरदस्त प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। आज इस अभियान के तहत यूनिफॉर्म के नाम पर होने वाली लूट को उजागर किया जाएगा। साथ ही बताया जाएगा कि इस ठगी से बचने के लिए अभिभावकों के क्या अधिकार हैं और वे इस लूट को कैसे रोक सकते हैं।

किताबों के बाद अब यूनिफॉर्म की ठगी सामने आई

प्राइवेट स्कूल सिर्फ किताबोंके नाम पर ही नहीं बल्कि यूनिफॉर्म के नाम पर भी अभिभावकों की जेब काट रहे हैं। आपमें से कई लोगों ने महंगी स्कूल यूनिफॉर्म की शिकायत भी की है। स्कूल एक ही दुकान से यूनिफॉर्म खरीदने पर जोर देते हैं। उस दुकान पर दाम बाजार भाव से कई गुना ज्यादा होते हैं। यह पूरा तंत्र व्यवस्थित ढंग से काम कर रहा है।

यूनिफॉर्म ठगी का बाजार कितना बड़ा?

यूनिफॉर्म केनाम पर होने वाली ठगी का बाजार करोड़ों रुपये में फैला है। स्कूल और दुकानदारों के बीच सांठगांठ होती है। पैरेंट्स को मजबूरन वहीं से महंगी यूनिफॉर्म खरीदनी पड़ती है। एक साधारण यूनिफॉर्म का सेट 500 रुपये का होता है, लेकिन स्कूल की सिफारिश वाली दुकान पर वही सेट 1500 से 2000 रुपये में बिकता है। यह सीधी लूट है।

पैरेंट्स के पास क्या अधिकार हैं?

कानून केतहत कोई भी स्कूल किसी खास दुकान से ही यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। आरटीई अधिनियम के तहत स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होता है कि वे अभिभावकों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ न डालें। अगर कोई स्कूल किसी खास दुकान से यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बनाता है, तो पैरेंट्स इसकी शिकायत कर सकते हैं।

कहां करें शिकायत?

इस लूट कोरोकने के लिए सरकार के पास तंत्र मौजूद है। सबसे पहले स्कूल प्रबंधन से इस मामले को उठाएं। अगर वहां कोई सुनवाई नहीं होती, तो जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से शिकायत करें। इसके अलावा राज्य के शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) में भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। ये अधिकारी स्कूलों पर कार्रवाई कर सकते हैं।

देश का सिस्टम जागा, सरकारें हरकत में

DNA केखुलासे के बाद कई राज्यों के शिक्षा मंत्रालय हरकत में आ गए हैं। उन्होंने प्राइवेट स्कूलों के मनमाने शुल्क और महंगी किताब-यूनिफॉर्म पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। अब अभिभावकों को भी आगे आना होगा। अपने अधिकारों का इस्तेमाल करें। इस संगठित लूट को रोकने के लिए आवाज उठाएं। सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे इस लूट को रोकें। उनसे शिकायत करें और उचित कार्रवाई की मांग करें।

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