रिकॉर्ड ऊंचाई से 27 परसेंट तक फिसला सोना, जानें 2026 में क्यों फीकी पड़ रही है गोल्ड की चमक

- Advertisement -

Mumbai News: साल 2025 में 65 परसेंट की शानदार तेजी दिखाने वाला सोना 2026 में अब तक निवेशकों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है। इस साल की पहली छमाही में सोने की कीमतों में करीब 4 परसेंट की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशक थोड़े परेशान नजर आ रहे हैं।

जनवरी 2026 के अंत में सोना 5,602 डॉलर प्रति औंस के ऑल टाइम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। इसके बाद अचानक कमोडिटी बाजार की दिशा बदल गई और कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। ग्लोबल फैक्टर्स के चलते सोने के भाव में लगातार उतार-चढ़ाव का दौर जारी है।

- Advertisement -

रिकॉर्ड स्तर से फिसली कीमतें और अमेरिका-ईरान डील का बड़ा असर

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और निवेशकों की ताबड़तोड़ मुनाफावसूली के चलते सोने के प्राइस में तेज गिरावट आई है। जून महीने में इसका भाव करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया। यह रेट अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 27 परसेंट नीचे आ चुका था।

फिलहाल इंटरनेशनल मार्केट में सोना करीब 4,214 डॉलर प्रति औंस के आसपास बना हुआ है। बाजार की नजरें इस समय अमेरिका और ईरान के बीच हुए महत्वपूर्ण समझौते पर टिकी हुई हैं। होर्मुज स्ट्रेट खुलने से क्रूड ऑयल मार्केट को बड़ी राहत मिली है और तेल काफी सस्ता हुआ है।

तेल की कीमतों में करीब 15 परसेंट की बड़ी गिरावट आई है, लेकिन निवेशक अभी भी इस बात को लेकर काफी सतर्क हैं। वे देख रहे हैं कि यह समझौता कितने समय तक टिकेगा और क्षेत्र में जियोपॉलिटिकल टेंशन कितना कम होगा। इसी वजह से मार्केट में पूरी तरह स्टेबिलिटी नहीं आ पा रही है।

यूएस फेडरल रिजर्व की सख्ती बनी सोने की कमजोरी की बड़ी वजह

आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने और तेल सस्ता होने से सोने को बड़ा सहारा मिलता है, लेकिन इस बार कहानी पूरी तरह अलग है। फिलहाल सोने की चाल कच्चे तेल से नहीं, बल्कि अमेरिकी ब्याज दरों और फेडरल रिजर्व के कड़े फैसलों से तय हो रही है।

बीते 17 जून को हुई अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के बाद संकेत मिले हैं कि साल 2026 में कम से कम एक बार और ब्याज दरों में बढ़ोतरी संभव है। फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने भी साफ किया कि महंगाई को कंट्रोल में रखना ही उनकी सबसे पहली प्राथमिकता है।

इससे अमेरिकी मार्केट में ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद बेहद कमजोर पड़ गई है। एक्सपर्ट्स के अनुसार ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए कभी भी अच्छी खबर नहीं मानी जाती हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि सोना निवेशकों को सीधे कोई रेगुलर ब्याज नहीं देता है।

मार्केट एक्सपर्ट्स की राय और सोने में दोबारा तेजी आने की उम्मीद

ऐसे माहौल में निवेशकों का रुझान फिक्स्ड इनकम वाले दूसरे सुरक्षित ऑप्शंस की तरफ तेजी से बढ़ सकता है। कमोडिटी बाजार के जानकारों का मानना है कि अमेरिकी फेड के सख्त रुख और मजबूत डॉलर इंडेक्स ने सोने पर बहुत ज्यादा दबाव बढ़ा दिया है।

इसके अलावा हालिया बंपर तेजी के बाद निवेशकों द्वारा की गई भारी प्रॉफिट बुकिंग ने भी कीमतों में गिरावट की रफ्तार को तेज किया है। विशेषज्ञ सभी निवेशकों को अमेरिका-ईरान वार्ता पर कड़ी नजर बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि इससे हलचल बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि आने वाले महीनों में महंगाई पूरी तरह नियंत्रित होती है और फेड ब्याज दरों में कटौती का फैसला लेता है, तो सोने में फिर से शानदार तेजी लौट सकती है। वहीं, महंगाई ऊंची रहने पर भी सोना एक सेफ इन्वेस्टमेंट बना रहेगा।

- Advertisement -

बड़ी खबरें

Topics

Related Articles