अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक आज, चंपत राय के विकल्प के रूप में बजरंग बागड़ा का नाम सबसे आगे

Ayodhya News: अयोध्या राम मंदिर के बहुचर्चित चढ़ावा चोरी मामले को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक बेहद अहम बैठक आज आयोजित होने जा रही है। दोपहर तीन बजे होने वाली इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर अंतिम मुहर लग सकती है।

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चंपत राय के इस्तीफे के बाद नए विकल्पों पर भी होगी चर्चा

यदि बैठक में दोनों शीर्ष पदाधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए जाते हैं, तो उनके स्थान पर नए विकल्पों को लेकर भी मंथन शुरू हो जाएगा। राजनीतिक गलियारों में नए महासचिव के लिए विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के केंद्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा और बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक नीरज दौनेरिया का नाम सबसे आगे चल रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय के विकल्प के तौर पर विहिप महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा ट्रस्ट की पहली पसंद बन सकते हैं। बागड़ा विहिप में अंतरराष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी संभालने के साथ ही पेशे से एक वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। वे पहले नेशनल एल्युमिनियम कंपनी (नालको) के चेयरमैन के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

इसके अतिरिक्त भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी और वर्तमान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्वी उत्तर प्रदेश के संघचालक कृष्णमोहन का नाम भी इस रेस में शामिल है। वहीं, दिवंगत सदस्य विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के रिक्त स्थान पर भी नए सदस्य के मनोनयन की पूरी संभावना है।

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चंपत राय के फैसले पर दो धड़ों में बंटा राम मंदिर ट्रस्ट

इस बड़ी बैठक से पहले राम मंदिर ट्रस्ट पूरी तरह से दो वैचारिक धड़ों में विभाजित नजर आ रहा है। एक पक्ष का मानना है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा पूरी तरह निर्दोष हैं और उन्होंने भव्य मंदिर का निर्माण कराया है, इसलिए उन पर केवल पद छोड़ने का दबाव बनाया जाए और सदस्य बनाए रखा जाए।

इसके विपरीत, दूसरा धड़ा यह तर्क दे रहा है कि चोरी में भले ही चंपत राय की कोई सीधी भूमिका न हो, लेकिन वे अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारी से पूरी तरह बच नहीं सकते। जब शिकायतें आ रही थीं, तब उन्होंने मंदिर स्टाफ पर जरूरत से ज्यादा भरोसा किया और समय रहते कोई सख्त कदम नहीं उठाया।

ट्रस्ट के वयोवृद्ध न्यासी स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने इस विवाद पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अपराध किसी का भी हो, उसे बिल्कुल भी क्षमा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि चंपत राय राम मंदिर आंदोलन के समय के समर्पित कार्यकर्ता हैं, इसलिए बैठक में पहले उनका पक्ष सुना जाएगा और फिर बहुमत से उचित निर्णय लिया जाएगा।

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