Ambala News: हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज का राजनीतिक व्यक्तित्व जितना बेबाक माना जाता है, उतना ही उनका संगठन के प्रति समर्पण भी गहरा है। लगभग पांच दशक से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े विज का कहना है कि उन्होंने जीवन में कभी किसी पद या मंत्रालय की इच्छा नहीं की।
संगठन के फैसलों पर कभी सवाल नहीं उठाया
सात बार के विधायक अनिल विज ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कभी पार्टी के फैसलों पर सवाल नहीं उठाया। बैंक की नौकरी छोड़ने से लेकर चुनाव लड़ने और संगठन के निर्देश पर काम करने तक, हर निर्णय उन्होंने हमेशा सर्वोपरि माना। उन्होंने कभी किसी आदेश पर आपत्ति दर्ज नहीं की।
विज ने बताया कि संगठन ने उन्हें हमेशा योग्यता को प्राथमिकता देने का संस्कार दिया है। यही कारण है कि वे अन्य नेताओं की तरह पैरवी करने दिल्ली जाने के बजाय अपने विधानसभा क्षेत्र अंबाला छावनी में जनता के बीच सक्रिय रहे। वे खुद को हमेशा पार्टी का एक सच्चा सिपाही मानते हैं।
भाजपा एक पूरी तरह लोकतांत्रिक पार्टी है
विज ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी किसी परिवार या व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की लोकतांत्रिक पार्टी है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा में सभी निर्णय एक तय प्रक्रिया के तहत होते हैं। संगठन जहां भी उन्हें जिम्मेदारी सौंपेगा, वे वहां निष्ठा से कार्य करेंगे।
विपक्ष पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले भी उनके सवालों से डरती थी और आज भी डरती है। सदन में तथ्यों के साथ सरकार को घेरने के कारण उन्हें कई बार बाहर निकाला गया। उनका मानना है कि कांग्रेस एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाने में पूरी तरह विफल रही है।
जनता का विश्वास और स्नेह ही सबसे बड़ी ताकत
अनिल विज का कहना है कि सबसे वरिष्ठ विधायक होने के नाते उनके लंबे राजनीतिक अनुभव का लाभ संगठन और सरकार दोनों को मिलना चाहिए। लोकतंत्र में अपनी राय रखना हर जनप्रतिनिधि का अधिकार है। वे हमेशा सही मंच पर अपनी बात बेबाकी से रखते आ रहे हैं।
उन्होंने साफ किया कि उनकी राजनीति कभी धनबल, बाहुबल या जातीय समीकरणों पर आधारित नहीं रही। वे जैसे पहले थे, आज भी वैसे ही साधारण कार्यकर्ता हैं। उन्हें सात बार विधानसभा तक पहुंचाने वाली सबसे बड़ी ताकत केवल अंबाला की जनता का अटूट विश्वास और स्नेह है।

