Lucknow News: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर चल रहे विवाद के बीच, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के दो दिवसीय लखनऊ दौरे पर उत्तर प्रदेश की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) और सत्ताधारी दल के बीच तीखी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है।
अखिलेश यादव का तंज और राम मंदिर विवाद की ओर इशारा
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी अध्यक्ष के इस दौरे पर तंज कसते हुए एक बड़ा राजनीतिक सवाल खड़ा किया। उन्होंने पूछा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन पहली बार लखनऊ आए हैं, तो क्या वे अयोध्या जाकर रामलला के “दर्शन” नहीं करेंगे?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सपा प्रमुख का यह सीधा इशारा राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे को लेकर हाल ही में सामने आए विवादों की तरफ था। अखिलेश यादव के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है, जिसने आगामी चुनावों से पहले माहौल को और गरमा दिया है।
दूसरी तरफ, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का यह उत्तर प्रदेश प्रवास पूरी तरह से संगठनात्मक एजेंडे पर केंद्रित रहा। उन्होंने राजधानी लखनऊ में प्रदेश पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं और आगामी चुनावी रोडमैप पर विस्तार से चर्चा की।
साइकिल पंचर नहीं, इस बार सीधे कबाड़ में जाएगी- नितिन नवीन
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने रविवार को लखनऊ में आयोजित भव्य ‘शक्ति केंद्र संयोजक सम्मेलन’ में विपक्ष पर जोरदार पलटवार किया। उन्होंने चुनावी बिगुल फूंकते हुए कांग्रेस को पूरी तरह अप्रासंगिक बताया और सपा की राजनीति को जड़ से समाप्त करने का दावा करते हुए कहा कि इस बार साइकिल पंचर नहीं, बल्कि सीधे कबाड़ में जाएगी।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने विपक्षी दलों पर तुष्टिकरण, परिवारवाद और समाज को जाति के आधार पर बांटने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिए ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूल मंत्र पर राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ निरंतर कार्य कर रही है।
आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जिक्र करते हुए नितिन नवीन ने दावा किया कि वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश के प्रत्येक बूथ पर एक बार फिर प्रचंड बहुमत के साथ कमल खिलेगा। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम और ऊर्जा के सामने विपक्षी गठबंधन की कोई भी रणनीति टिक नहीं पाएगी।

