Delhi News: उत्तर भारत में तपती गर्मी के बीच स्कूलों में लंबी छुट्टियों का बिगुल बज चुका है। दिल्ली, यूपी और बिहार समेत कई राज्यों में समर वेकेशन शुरू हो रही हैं। यह समय बच्चों के लिए केवल मौज-मस्ती का नहीं, बल्कि नई प्रतिभाओं को निखारने का स्वर्णिम अवसर है। अक्सर पेरेंट्स इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि बच्चे दिनभर स्क्रीन पर चिपके रहेंगे। लेकिन सही योजना से आप इन 40-50 दिनों को उनके शारीरिक और मानसिक विकास का आधार बना सकते हैं।
रसोई में सिखाएं आत्मनिर्भरता के गुर
बच्चों को रसोई में समय बिताना काफी पसंद होता है। उन्हें ‘नो-फ्लेम कुकिंग’ के जरिए आत्मनिर्भर बना सकते हैं। आप उन्हें सैंडविच बनाना, फलों का सलाद सजाना या नींबू पानी तैयार करना सिखाएं। इस गतिविधि से बच्चों में भोजन की बर्बादी न करने की समझ विकसित होती है। साथ ही वे अपनी छोटी-मोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना कम कर देते हैं। यह अनुभव उनके लिए किसी एडवेंचर से कम नहीं होता और वे काफी खुश रहते हैं।
मिट्टी से जुड़ाव और जिम्मेदारी का पाठ
गार्डनिंग बच्चों को प्रकृति के करीब लाने का सबसे बेहतर तरीका है। मोबाइल गेमिंग की जगह उन्हें मिट्टी और पौधों के बीच समय बिताने के लिए प्रेरित करें। उन्हें छोटे गमले दें और धनिया या पुदीना जैसे आसान पौधे उगाने को कहें। रोजाना पौधों को पानी देने की जिम्मेदारी उन्हें अनुशासन सिखाएगी। जब उनकी मेहनत से नन्हा पौधा बाहर आएगा, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा। यह एक्टिविटी उन्हें स्क्रीन की काल्पनिक दुनिया से बाहर निकालकर वास्तविक जीवन से जोड़ेगी।
कहानियों की दुनिया में जगाएं रुचि
किताबें बच्चों की सबसे अच्छी दोस्त साबित हो सकती हैं। छुट्टियों के दौरान उन्हें ‘रीडिंग चैलेंज’ दें ताकि उनका शब्दकोश बेहतर हो सके। आप पंचतंत्र की कहानियां या महापुरुषों की जीवनियां उनके कमरे में रखें। घर के किसी कोने में एक छोटा सा ‘रीडिंग कॉर्नर’ बनाएं। इससे बच्चों में एकाग्रता बढ़ेगी और वे मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञान भी अर्जित करेंगे। अच्छी किताबें पढ़ने की आदत उन्हें जीवनभर सही फैसले लेने में मदद करती है और मानसिक विकास तेज करती है।
नई स्किल्स और रचनात्मक वर्कशॉप्स
आजकल कई ऑनलाइन और ऑफलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के लिए विशेष समर वर्कशॉप्स चलती हैं। आप बच्चे की रुचि के अनुसार उन्हें कोडिंग, गिटार या पेंटिंग की क्लास में डाल सकते हैं। यदि बच्चा खेलकूद में ज्यादा सक्रिय है, तो स्विमिंग या स्केटिंग उसके लिए बेहतरीन विकल्प है। ऐसी क्लासेस से उनमें टीम वर्क की भावना आती है। नई स्किल सीखने से न केवल उनका समय सही उपयोग होगा, बल्कि वे भविष्य के लिए भी तैयार होंगे।
कबाड़ से जुगाड़ और इमेजिनेशन
घर में पड़ी बेकार चीजों से आर्ट वर्क तैयार करना बच्चों की रचनात्मकता बढ़ाता है। पुरानी चूड़ियां, खाली डिब्बे या अखबारों को फेंकने के बजाय उन्हें नया रूप देने को कहें। उन्हें गोंद, पेंट और अपनी कल्पना का उपयोग करने की पूरी छूट दें। ‘बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट’ तकनीक से बच्चे चीजों को नए नजरिए से देखना सीखते हैं। यह गतिविधि उनकी इमेजिनेशन पावर को पंख देती है। अंत में उनकी बनाई चीजों को घर में सजाकर उन्हें प्रोत्साहित जरूर करें।

