Uttarakhand News: राजाजी टाइगर रिजर्व के प्रतिबंधित और संरक्षित वन क्षेत्र में समाज कल्याण मंत्री खजान दास के पुत्र के विवाह समारोह के मामले में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। प्राथमिक जांच रिपोर्ट आने के बाद विभाग ने रेंज अधिकारी सहित चार फील्ड अधिकारियों को सजा दी है। हालांकि, इस पूरे मामले में टाइगर रिजर्व के उच्च अधिकारियों और स्वयं समाज कल्याण मंत्री व उनके करीबियों के खिलाफ अब तक कोई कानूनी कदम नहीं उठाया गया है। यह पक्षपातपूर्ण कार्रवाई अब चर्चा का विषय बन गई है और विभागीय पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा रही है।
सुरेश्वरी देवी मंदिर में रचाई गई शाही शादी
राजाजी टाइगर रिजर्व के भीतर स्थित प्राचीन सुरेश्वरी देवी मंदिर परिसर में रविवार को समाज कल्याण मंत्री खजान दास के पुत्र का विवाह संपन्न हुआ। शादी के भव्य आयोजन के लिए शनिवार 25 अप्रैल को वन क्षेत्र के भीतर एक विशाल और शाही पंडाल लगाया गया था। जैसे ही संरक्षित क्षेत्र में इतने बड़े निजी आयोजन की खबर फैली, वन विभाग के निचले अमले में हड़कंप मच गया। शनिवार रात को ही टीम ने मौके पर पहुंचकर पंडाल हटवाया और मंदिर समिति के पदाधिकारियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया।
नियमों की धज्जियां उड़ाकर पहुंचे वीआईपी
26 अप्रैल को आयोजित इस विवाह समारोह में भाजपा के कई दिग्गज नेता और वीआईपी मेहमान शामिल हुए। प्रतिबंधित क्षेत्र होने के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में लोगों और गाड़ियों का प्रवेश कैसे हुआ, यह जांच का मुख्य बिंदु है। समाज कल्याण मंत्री खजान दास का दावा है कि यह पूरा मामला टाइगर रिजर्व के एक वरिष्ठ अधिकारी की जानकारी में था। मंत्री के अनुसार, संबंधित अधिकारी ने मौखिक रूप से कार्यक्रम की स्वीकृति दी थी और उन्हें व्यक्तिगत रूप से विवाह का निमंत्रण भी भेजा गया था।
चार अधिकारियों पर गिरी गाज, उच्चाधिकारी सुरक्षित
मामले की गंभीरता को देखते हुए वाइल्ड लाइफ वार्डन अजय लिंगवाल को जांच सौंपी गई थी। जांच की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर मोतीचूर रेंज के अधिकारी महेश सेमवाल से हरिद्वार रेंज का अतिरिक्त प्रभार छीन लिया गया है। वन दारोगा अमृता सिंह को टाइगर रिजर्व कार्यालय से अटैच कर दिया गया है। वहीं, रानीपुर गेट पर तैनात फॉरेस्ट गार्ड अमित सैनी और अभिषेक कंडारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। छोटे कर्मचारियों पर हुई इस कठोर कार्रवाई ने वन विभाग के भीतर असंतोष पैदा कर दिया है।
सवालों के घेरे में राजाजी टाइगर रिजर्व का नेतृत्व
फील्ड अधिकारियों पर हुई इस गाज के बाद अब टाइगर रिजर्व के निदेशक और अन्य उच्च अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का पूछना है कि क्या बिना उच्चाधिकारियों की सहमति के संरक्षित क्षेत्र में इतना बड़ा शाही पंडाल लग सकता था? मंत्री द्वारा मौखिक अनुमति की बात स्वीकारने के बाद भी वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध कोई जांच शुरू नहीं की गई है। वन्यजीव प्रेमियों ने मांग की है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले रसूखदारों और उन्हें मौन सहमति देने वाले बड़े अफसरों पर भी समान कार्रवाई होनी चाहिए।

