Azamgarh News: अर्द्धसैनिक बलों में फर्जी डोमिसाइल प्रमाणपत्र के जरिए नौकरी हासिल करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने गिरोह के सरगना विद्यासागर और उसके साथियों की तलाश में छापेमारी तेज कर दी है। असम सरकार की विशेष जांच समिति उन सभी नियुक्तियों का सत्यापन कर रही है, जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर की गई थीं।
जांच की जद में सीआरपीएफ, एसएसबी, बीएसएफ, आईटीबीपी और सीआईएसएफ जैसे प्रमुख बल हैं। सत्यापन प्रक्रिया इतनी सख्त है कि भर्ती हो चुके जवानों की सेवाएं भी समाप्त की जा रही हैं। आजमगढ़ जिले के 15 से अधिक ऐसे जवान अपनी नौकरी गंवा चुके हैं, जिनमें से कुछ ने तो चार साल तक देश की सेवा भी की थी।
करोड़ों की संपत्ति और ठगी का साम्राज्य
पुलिस पड़ताल में सामने आया है कि इस गिरोह ने ठगी के करोड़ों रुपये से अचल संपत्ति का बड़ा जाल बुना है। सरगना विद्यासागर ने न केवल आलीशान मकान और गाड़ियां खरीदीं, बल्कि अरुणाचल प्रदेश में 90 लाख रुपये की जमीन भी लीज पर ली है। पुलिस अब इन बेनामी संपत्तियों के स्रोत और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच कर रही है।
यह गिरोह पहले भी कानून की नजरों में आ चुका है। वर्ष 2020 में अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने विद्यासागर को फर्जी दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार किया था। जमानत पर बाहर आने के बावजूद, उसने अपना नेटवर्क जारी रखा। अब पुलिस गिरोह के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रही है और उनकी अवैध संपत्ति को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस बीच, शिकायत करने वाले अभ्यर्थियों को धमकियां मिलने की घटनाएं भी सामने आई हैं। हाल ही में, कुछ लोगों ने एक पीड़ित के पास पहुंचकर मामले को दबाने का दबाव बनाया और जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। जांच का दायरा अब स्थानीय प्रभावशाली लोगों तक भी फैल रहा है।
Author: Rohit Mahato

