Mumbai News: शेयर बाजार के निवेशकों के लिए जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड से जुड़ी एक बेहद बड़ी और बुरी खबर सामने आई है। भारी वित्तीय संकट में डूबी इस दिग्गज कंपनी के शेयर गुरुवार को स्टॉक एक्सचेंज से हमेशा के लिए डीलिस्ट हो जाएंगे।
कंपनी के शेयर अब बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर कभी दिखाई नहीं देंगे। आधिकारिक एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने बताया कि उसे डीलिस्टिंग के लिए अंतिम मंजूरी मिल चुकी है। इस बड़े फैसले से छह लाख से अधिक छोटे खुदरा निवेशकों को सबसे तगड़ा झटका लगा है।
निवेशकों के लिए एग्जिट प्राइस हुआ पूरी तरह शून्य
कंपनी ने शेयर बाजार को पहले ही साफ कर दिया था कि नए रेजोल्यूशन प्लान के तहत आम शेयरधारकों को कोई भुगतान नहीं मिलेगा। कंपनी की खराब वित्तीय स्थिति के कारण उपलब्ध संपत्तियों की कुल कीमत से सुरक्षित कर्जदाताओं का पूरा पुराना बकाया चुकाना भी मुमकिन नहीं है।
दिवाला प्रक्रिया के सख्त नियमों के तहत सबसे पहले बैंकों और सुरक्षित कर्जदाताओं का पैसा वापस किया जाता है। जब उनके लिए ही रकम पर्याप्त नहीं बची, तो आम निवेशकों के हिस्से कुछ नहीं आया। इसी वजह से छोटे खुदरा निवेशकों के लिए एग्जिट प्राइस को शून्य तय किया गया है।
अडानी समूह के अधिग्रहण से बैंकों को मिली बड़ी राहत
इस संकटग्रस्त कंपनी के शेयरधारकों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इसमें छह लाख चालीस हजार से ज्यादा छोटे खुदरा निवेशक शामिल थे। कंपनी में इन आम लोगों की कुल पैंतालीस प्रतिशत हिस्सेदारी थी। अब स्टॉक एक्सचेंज से बाहर होने के बाद यह पूरी हिस्सेदारी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
यह मामला देश के सबसे लंबे दिवाला मामलों में शामिल रहा है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की इलाहाबाद बेंच ने अडानी एंटरप्राइजेज की चौदह हजार पांच सौ पैंतीस करोड़ रुपए की समाधान योजना को मंजूरी दी थी। इस बड़े अधिग्रहण से जेपी के कई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स अब अडानी ग्रुप के पास चले गए हैं।
भारी कर्ज में डूबी कंपनियों से दूर रहने का बड़ा सबक
अडानी समूह ने इस समाधान योजना के तहत अपनी पहली किस्त के रूप में छह हजार करोड़ रुपए का बड़ा भुगतान बैंकों को समय पर कर दिया है। इससे कर्ज देने वाले वित्तीय संस्थानों को तो बड़ी राहत मिली है, लेकिन आम जनता की गाढ़ी कमाई पूरी तरह डूब गई।
फिलहाल जेपी एसोसिएट्स के शेयरों में हर तरह की ट्रेडिंग को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। बाजार में नियमित निवेश करने वाले आम लोगों के लिए यह मामला एक बड़ा सबक है कि भारी कर्ज में डूबी और घाटे वाली कंपनियों में निवेश करना आत्मघाती साबित हो सकता है।
Author: Rajesh Kumar

