सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी, इलाज के लिए घंटों लाइनों में लग रहे परेशान मरीज

District Hospital News: सरकारी अस्पतालों में व्यवस्था सुधारने के तमाम सरकारी दावों के बावजूद जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक बनी हुई है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। हर तीन महीने में डॉक्टर और पैंतालीस दिनों में नया स्टाफ बदलने से मरीजों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।

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अस्पताल में हर तीन महीने में बदल रहे प्रशिक्षु डॉक्टर

जिला अस्पताल में इस समय सीनियर डॉक्टरों और विशेषज्ञों की भारी कमी चल रही है। इस संकट को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग डिस्ट्रिक्ट रेजिडेंसी प्रोग्राम के तहत प्रशिक्षु डॉक्टरों की तैनाती कर रहा है। एमडी और एमएस की पढ़ाई कर रहे ये जूनियर डॉक्टर हर तीन महीने में बदल जाते हैं।

दवा काउंटर पर बढ़ रही मरीजों की लंबी लाइनें

अस्पताल का पैरामेडिकल स्टाफ भी ट्रेनिंग पर आया नया बैच है, जिससे दवा वितरण की गति धीमी हो गई है। नए स्टाफ को डॉक्टरों के पर्चे पर लिखी दवाइयां समझने में काफी समय लगता है। सोमवार को ओपीडी के बाद दवा काउंटर पर मरीजों की बहुत लंबी लाइनें देखी गईं।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या घटकर आधी से भी कम हुई

अस्पताल में स्वीकृत पैंतीस विशेषज्ञ डॉक्टरों की जगह अब बेहद कम डॉक्टर बचे हैं। वर्तमान में केवल चार सर्जन, चार नेत्र विशेषज्ञ और तीन हड्डी रोग विशेषज्ञ ही सेवाएं दे रहे हैं। डॉक्टरों की इस भारी कमी को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य निदेशालय हर तिमाही नए प्रशिक्षु भेजता है।

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फार्मासिस्ट की कमी से दवा वितरण व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी

अस्पताल में स्वीकृत सोलह फार्मासिस्ट में से अब केवल नौ ही कार्यरत बचे हैं। इनमें से चार फार्मासिस्टों की ड्यूटी चौबीस घंटे चलने वाली इमरजेंसी सेवाओं में रोटेशन के आधार पर लगती है। इस कमी के कारण दवा वितरण का पूरा काम बीफार्मा के पंद्रह छात्रों के भरोसे चल रहा है।

ब्रांडेड नाम और खराब राइटिंग से बढ़ी मरीजों की आफत

प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों से आए डॉक्टरों को सरकारी अस्पताल की जेनेरिक दवाओं के नाम समझने में शुरुआती दिक्कत आती है। इसके साथ ही डॉक्टरों की खराब हैंडराइटिंग के कारण भी प्रशिक्षु स्टाफ दवा नहीं पढ़ पाता है। इस वजह से सीनियर से बार-बार पूछने में मरीजों का कीमती समय बर्बाद होता है।

ओपीडी में पहुंचे रिकॉर्ड मरीज लेकिन सुविधाएं पूरी तरह फेल

सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में कुल उनतीस सौ मरीज परामर्श के लिए पहुंचे थे। पर्चा काउंटर, ओपीडी रूम और पैथोलॉजी लैब के बाहर मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार डॉक्टरों को साफ राइटिंग में दवाएं लिखने और व्यवस्था सुधारने के सख्त निर्देश दिए जा रहे हैं।

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