IOCL Expansion Program: भारत का पेट्रोलियम प्रोडक्ट एक्सपोर्ट बढ़ेगा, जानिए क्या है सरकारी कंपनी का पूरा मेगा प्लान

New Delhi News: भारत का पेट्रोलियम प्रोडक्ट एक्सपोर्ट अगले कुछ वर्षों में करीब एक-चौथाई बढ़ सकता है। इस बड़ी छलांग का मुख्य कारण देश की सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन का अब तक का सबसे बड़ा एक्सपेंशन प्रोग्राम है। दिसंबर 2026 तक इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत नई रिफाइनिंग कैपेसिटी पूरी तरह शुरू हो जाएगी।

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IOCL की रिफाइनिंग क्षमता में होगी रिकॉर्ड बढ़ोतरी

इस बड़े विस्तार प्रोजेक्ट के बाद सरकारी तेल कंपनी की कुल रिफाइनिंग क्षमता रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगी। कंपनी की मौजूदा क्षमता 80.75 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जो बढ़कर 98.05 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष हो जाएगी। इससे घरेलू बाजार में ईंधन की आपूर्ति मजबूत होगी और अतिरिक्त स्टॉक विदेशी बाजारों में भेजा जा सकेगा।

टारगेट से ज्यादा घरेलू बाजार को प्राथमिकता देगा IOCL

एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, कंपनी का मुख्य फोकस हमेशा घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करना रहेगा। स्थानीय मांग को पूरा करने के बाद जो अतिरिक्त पेट्रोल-डीजल बचेगा, उसे ही एक्सपोर्ट मार्केट में भेजा जाएगा। इससे कंपनी की कुल रेवेन्यू हिस्सेदारी मौजूदा 5 फीसदी से बढ़कर लगभग 15 फीसदी तक पहुंचने की पूरी संभावना है।

तीन प्रमुख रिफाइनरीज पर खर्च होंगे 75000 करोड़

इस पूरे मेगा प्रोजेक्ट की कुल लागत ₹75,000 करोड़ है, जिसमें से ₹53,500 करोड़ से अधिक की राशि पहले ही खर्च की जा चुकी है। इस योजना के तहत पानीपत, वडोदरा और बरौनी रिफाइनरीज की क्षमता बढ़ाई जा रही है। इन तीनों महत्वपूर्ण लोकेशंस पर निर्माण कार्य नवंबर-दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।

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ग्लोबल रिफाइनिंग हब के रूप में उभरेगा भारत

भारत की मौजूदा रिफाइनिंग क्षमता लगभग 258.1 मिलियन मीट्रिक टन है, जबकि घरेलू खपत 239 मिलियन मीट्रिक टन है। देश की रिफाइनरीज अपनी क्षमता से 115 फीसदी तक अधिक काम करती हैं, जिससे कुल उत्पादन 300 मिलियन टन पहुंच जाता है। लगभग 61.5 मिलियन टन का अतिरिक्त उत्पादन हर साल विदेशों में एक्सपोर्ट होता है।

वर्तमान में भारत के कुल रिफाइंड फ्यूल एक्सपोर्ट में लगभग 70 फीसदी हिस्सेदारी रिलायंस इंडस्ट्रीज की है, जो जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स चलाती है। अब IOCL द्वारा 17.3 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता जोड़ने से देश में विदेशी मुद्रा की कमाई तेजी से बढ़ेगी। भारत वैश्विक स्तर पर एक मजबूत रिफाइनिंग हब बन रहा है।

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