Delhi News: स्मार्टफोन की लगातार बजती नोटिफिकेशन, करियर का दबाव और सोशल मीडिया पर हमेशा सक्रिय रहने की होड़ युवाओं को थका रही है। इस तनाव से निपटने के लिए अब ‘जेन जी’ (Gen Z) पीढ़ी के युवा ‘माइक्रो डिटैचमेंट’ का सहारा ले रहे हैं। इसके तहत वे डिजिटल दुनिया और गैर-जरूरी इमोशनल प्रेशर से कुछ समय के लिए दूरी बना रहे हैं।
मनोवैज्ञानिकों और जीवनशैली विशेषज्ञों का मानना है कि यह किसी मानसिक बीमारी का स्थाई इलाज नहीं है। हालांकि, इसे एक सकारात्मक लाइफस्टाइल ट्रेंड के रूप में देखा जा रहा है। अगर युवा इसे सही तरीके से अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं, तो यह उनका मानसिक संतुलन बनाए रखने और आंतरिक शांति पाने में काफी मददगार साबित हो सकता है।
सोशल मीडिया और डिजिटल ओवरलोड से दूरी बनाकर खुद को रीसेट कर रहे युवा
हर मैसेज का तुरंत रिप्लाई देना और हर पोस्ट पर प्रतिक्रिया देना अब युवाओं के लिए मानसिक बोझ बन चुका है। अपनी मानसिक सेहत को प्राथमिकता देने के लिए युवा दिन में कुछ घंटे फोन को खुद से दूर रख रहे हैं। वे सोशल मीडिया से छोटा ब्रेक लेकर अपने लिए ‘मी टाइम’ यानी व्यक्तिगत समय निकाल रहे हैं।
आसान शब्दों में कहें तो माइक्रो डिटैचमेंट का मतलब जिंदगी की हर बात को दिल से न लगाना है। युवा अपने काम, पढ़ाई और रिश्तों में पूरी तरह शामिल तो रहते हैं, लेकिन अपनी खुशी को सिर्फ उन्हीं पर निर्भर नहीं होने देते। वे हर परिस्थिति में खुद को मानसिक रूप से टूटने से बचाने के लिए एक सुरक्षा कवच तैयार कर रहे हैं।
कॉर्पोरेट वर्कप्लेस में तेजी से बदल रहा है युवाओं के काम करने का तरीका
आजकल के आधुनिक ऑफिस और वर्कप्लेस में यह नया ट्रेंड सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। युवा कर्मचारी अपना काम समय पर पूरा करते हैं और अपने सभी टारगेट भी हासिल करते हैं। इसके बावजूद वे अपनी पूरी पहचान सिर्फ एक कंपनी के साथ नहीं जोड़ते। वे केवल अच्छी सैलरी के बजाय वर्क-लाइफ बैलेंस को अधिक महत्व दे रहे हैं
युवाओं का मानना है कि डिजिटल ओवरलोड और हर समय ऑनलाइन रहने की उम्मीदों ने उन्हें मानसिक रूप से थका दिया है। कोचिंग जाने वाले छात्र अनुराग और छात्रा सौम्या ने बताया कि फोन साइलेंट करने से उनका फोकस काफी बेहतर हुआ है। वहीं कामकाजी पेशेवर वीरेंद्र के अनुसार, ऑफिस के बाद लैपटॉप से दूरी बनाने से अगले दिन के लिए ऊर्जा मिलती है।
रिश्तों और जिम्मेदारियों से भागने का जरिया न बने यह लाइफस्टाइल ट्रेंड
विशेषज्ञों ने युवाओं को इस ट्रेंड को स्मार्ट तरीके से अपनाने की सलाह दी है। रोज कुछ समय का डिजिटल ब्रेक लेना, अच्छी नींद लेना और परिवार के साथ समय बिताना सेहत के लिए जरूरी है। हालांकि, सामाजिक शोधकर्ता चमन प्रकाश मिश्रा ने आगाह किया है कि इसे अपनी जिम्मेदारियों से भागने का रास्ता बिल्कुल नहीं बनाना चाहिए।
यदि कोई युवा लंबे समय तक लगातार तनाव महसूस कर रहा है, या उसकी रोजमर्रा की जिंदगी इससे प्रभावित हो रही है, तो उसे तुरंत किसी योग्य मनोचिकित्सक या काउंसलर से संपर्क करना चाहिए। मानसिक शांति के लिए उठाया गया यह छोटा कदम जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है, बशर्ते इसका उपयोग सही संतुलन के साथ किया जाए।

