Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में एक बड़ा खेल चल रहा है। शिक्षा विभाग और खेल विभाग बच्चों के सुनहरे भविष्य से सीधा खिलवाड़ कर रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च करके स्कूलों में एकदम नकली और घटिया खेल का सामान बांटा जा रहा है। कागजों में उच्च कोटि का सामान खरीदा जाता है। लेकिन असलियत में यह सामान कुछ ही महीनों में कबाड़ बन जाता है। इस भारी भ्रष्टाचार के कारण राज्य के होनहार खिलाड़ी बहुत निराश हैं। वे या तो अपना खेल छोड़ रहे हैं या फिर दूसरे राज्यों की तरफ पलायन कर रहे हैं।
कागजों में प्रीमियम, मैदान में पहुंच रहा कबाड़
आज के समय में खेलों का स्तर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत ऊपर उठ चुका है। अब खेलों में भी आधुनिक तकनीक और उपकरणों का भारी इस्तेमाल होता है। खेल विभाग और शिक्षा निदेशालय हर साल करोड़ों रुपये के खेल उपकरण खरीदते हैं। यह सरकारी खरीद जैम (GeM) पोर्टल और अन्य माध्यमों से की जाती है। खेल के सामान की कीमत बहुत उच्च स्तर की तय की जाती है। लेकिन स्कूलों तक बहुत ही निम्न दर्जे का सामान पहुंचाया जाता है। व्यापारी और भ्रष्ट अधिकारी मिलकर जनता के पैसे को खुलेआम डकार रहे हैं।
महीनों में ही टूट जाता है लाखों का सामान
स्कूलों में बांटे गए खेल उपकरणों की गुणवत्ता बेहद शर्मनाक है। निम्न दर्जे के बैडमिंटन रैकेट और शटल आज स्कूलों में चर्चा का बड़ा विषय बने हुए हैं। हाई जंप मैट, कबड्डी मैट और मुक्केबाजी रिंग का सामान भी बिल्कुल घटिया स्तर का है। जिम का लाखों रुपये का सामान कुछ महीनों बाद ही कबाड़ में तब्दील हो जाता है। पैसे खर्च करते समय कोई यह नहीं सोचता कि यह सामान बच्चों के इस्तेमाल लायक है भी या नहीं।
बिना खेल खेले बाबू कर रहे उपकरणों की खरीद
खेल का सामान खरीदने वाली कमेटियों का हाल बहुत ही बुरा है। इन कमेटियों में निदेशालय के अधिकारी और बाबू बैठे हैं। इनमें से अधिकांश लोगों ने अपनी जिंदगी में कभी कोई खेल नहीं खेला है। जिन्हें थोड़ी बहुत समझ है, वे भी अपने निजी लालच के कारण आंखें बंद कर लेते हैं। इन बाबू लोगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की आधुनिक खेल सामग्री की बिल्कुल भी परख नहीं है। इसी का फायदा उठाकर स्कूलों में घटिया स्तर की कृत्रिम प्ले फील्ड थोपी जा रही है।
कमेटी में हो सुधार, खिलाड़ियों को मिले मौका
खेल सामग्री की खरीद में तुरंत पूरी पारदर्शिता लाना बहुत जरूरी है। सरकार को खरीद कमेटी के नियमों में बड़े बदलाव करने चाहिए।
- कमेटी में संबंधित खेल का एक अनुभवी प्रशिक्षक जरूर शामिल होना चाहिए।
- कम से कम दो राष्ट्रीय स्तर के पदक विजेता खिलाड़ियों को भी इस कमेटी में जगह मिले।
- जिस स्कूल या कॉलेज को सामान मिले, वह कमेटी भी इस सामान की गुणवत्ता को परखे।
सुविधाओं के अभाव में हो रहा खिलाड़ियों का पलायन
बिना उच्च तकनीकी के उपकरणों के राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतना नामुमकिन है। खराब खेल सुविधाओं के कारण कई होनहार खिलाड़ी अपना खेल बीच में ही छोड़ देते हैं। वहीं जो खिलाड़ी आर्थिक रूप से संपन्न हैं, वे बेहतर सुविधाओं के लिए हिमाचल प्रदेश से पलायन कर जाते हैं। अगर सरकारी पैसे का सही और ईमानदारी से इस्तेमाल हो, तो हमारे युवा अपने ही राज्य में रहकर बेहतरीन प्रदर्शन कर सकते हैं। सरकार को इस बंदरबांट को तुरंत बंद करके खिलाड़ियों पर रहम खाना चाहिए।

