रवींद्रनाथ टैगोर और शर्मिला टैगोर का क्या है असली रिश्ता? सोहा अली खान ने सालों पुराने पारिवारिक राज से उठाया पर्दा

West Bengal News: बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर का नाता केवल पटौदी खानदान से ही नहीं, बल्कि विश्व विख्यात टैगोर परिवार से भी है। हाल ही में उनकी बेटी सोहा अली खान ने एक पॉडकास्ट के दौरान इस ऐतिहासिक संबंध पर खुलकर बात की। सोहा ने बताया कि नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर उनके परिवार के ‘ग्रेट ग्रैंड अंकल’ थे। यह खुलासा उन लोगों के लिए बेहद दिलचस्प है जो शर्मिला टैगोर के वंशज होने की पूरी कहानी जानना चाहते थे।

सोहा अली खान ने साझा किए नानी इरा टैगोर के किस्से

पॉडकास्ट में सोहा अली खान ने अपनी नानी इरा टैगोर और रवींद्रनाथ टैगोर के बीच के गहरे जुड़ाव का जिक्र किया। सोहा के मुताबिक, रवींद्रनाथ टैगोर के भाई गगनेन्द्रनाथ टैगोर उनकी नानी के परदादा थे। रवींद्रनाथ टैगोर शांति निकेतन में सोहा की नानी इरा के साथ काफी समय बिताते थे। गुरुदेव ने इरा टैगोर के लिए विशेष रूप से दो कविताएं भी लिखी थीं। सोहा ने यह भी बताया कि उनके पास उस दौर की कुछ दुर्लभ और बेशकीमती तस्वीरें आज भी मौजूद हैं।

नाना की एक गलती से नाराज हो गई थीं नानी

बातचीत के दौरान सोहा ने एक पुराना और भावुक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि रवींद्रनाथ टैगोर ने उनकी नानी के लिए कुछ संदेश लिखकर साइन किया था। हालांकि, बाद में सोहा के नाना ने अनजाने में उस ऑटोग्राफ या संदेश को फेंक दिया। इस बात को लेकर सोहा की नानी अपने पति से काफी लंबे समय तक नाराज रही थीं। टैगोर परिवार की विरासत को संजोने के प्रति सोहा अली खान ने अपनी मां शर्मिला और नानी के लगाव को विस्तार से बताया।

एशिया के पहले नोबेल विजेता रवींद्रनाथ टैगोर का व्यक्तित्व

रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 1861 में कोलकाता के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। वह साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई व्यक्तित्व थे। साल 1913 में उनके काव्य संग्रह ‘गीतांजलि’ के लिए उन्हें यह विश्व स्तरीय सम्मान मिला। गुरुदेव ने ही भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ रचा था। साहित्य के अलावा संगीत और कला में उनका योगदान अतुलनीय है। उनकी शिक्षाएं और रचनाएं आज भी दुनिया भर के लोगों को प्रेरित करती रहती हैं।

शर्मिला टैगोर का शानदार अभिनय और फिल्मी सफर

शर्मिला टैगोर ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1959 में सत्यजीत रे की फिल्म ‘अपुर संसार’ से की थी। इसके बाद उन्होंने ‘कश्मीर की कली’ से बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई। शम्मी कपूर और राजेश खन्ना के साथ उनकी जोड़ी बेहद सुपरहिट रही। उन्होंने ‘आराधना’, ‘अमर प्रेम’ और ‘अनुपमा’ जैसी फिल्मों के जरिए अभिनय के नए मानक स्थापित किए। 1944 में जन्मी शर्मिला ने अपनी प्रतिभा से साबित किया कि वह टैगोर परिवार की कलात्मक विरासत की सच्ची उत्तराधिकारी हैं।

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