दलाई लामा से मिलकर फूट-फूटकर रोने लगीं बॉलीवुड एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर, सोशल मीडिया पर बयां किया धर्मशाला का अनोखा अनुभव

Dharamshala News: मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री भूमि पेडनेकर इन दिनों अपनी फिल्मों से अलग एक खास वजह से चर्चा में हैं। आध्यात्मिक शांति की तलाश में वह हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला पहुंचीं। वहां उन्होंने तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद अभिनेत्री बेहद भावुक हो गईं।

भूमि पेडनेकर ने इस जादुई और लाइफ चेंजिंग अनुभव को सोशल मीडिया पर शेयर किया है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर दलाई लामा के साथ कुछ तस्वीरें पोस्ट की हैं। इन तस्वीरों में धर्मशाला की खूबसूरत वादियां और वहां का शांत वातावरण साफ दिखाई दे रहा है। फैंस इन तस्वीरों को खूब पसंद कर रहे हैं।

धर्मगुरु से मिलकर क्यों भावुक हुईं भूमि पेडनेकर?

अभिनेत्री ने पोस्ट के कैप्शन में लिखा कि दलाई लामा के पास बैठकर सब कुछ बहुत हल्का और शांत महसूस हुआ। यह अनुभव किसी खूबसूरत सपने जैसा था। वहां से लौटते समय उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। भूमि के मुताबिक, इस अनोखे एहसास को शब्दों में बयां करना नामुमकिन है।

भूमि ने आगे बताया कि वह लंबे समय से मानसिक शांति पाने की यात्रा पर हैं। जिंदगी के ऐसे पल उन्हें ईश्वर के प्रति अधिक शुक्रगुजार बनाते हैं। दलाई लामा से मिलना उनके लिए दया और प्रेम से भरा अनुभव रहा। वह इस सुनहरी याद को जिंदगीभर अपने दिल में संजोकर रखेंगी।

जानिए क्या है दलाई लामा का ऐतिहासिक सफर?

तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा का पूरा जीवन संघर्षों और इतिहास से भरा रहा है। साल 1959 में तिब्बत में चीनी शासन के खिलाफ भारी विद्रोह हुआ था। स्थितियां खराब होने पर दलाई लामा को अचानक तिब्बत छोड़ना पड़ा। वह अपने साथियों के साथ दुर्गम रास्तों से भारत आए थे।

उस समय भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने दलाई लामा का स्वागत किया था। भारत सरकार ने उन्हें देश में राजनीतिक शरण दी। इसके बाद हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में तिब्बती निर्वासित सरकार का केंद्र बना। आज भी यह स्थान तिब्बती समुदाय का सबसे बड़ा गढ़ माना जाता है।

मुलाकात के बाद भारत और चीन में बढ़ा तनाव

दलाई लामा को भारत में शरण मिलने से पड़ोसी देश चीन बुरी तरह भड़क गया था। चीन ने इस कदम को अपने आंतरिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप माना। इसी घटना के बाद दोनों देशों के बीच सीमा विवाद अचानक बहुत गहरा गया। इस कड़वाहट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को बदल दिया।

यह कूटनीतिक तनाव धीरे-धीरे इतना बढ़ गया कि साल 1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध छिड़ गया। इस ऐतिहासिक युद्ध ने दोनों देशों के आपसी रिश्तों को हमेशा के लिए बदल दिया। भूमि की इस यात्रा ने एक बार फिर धर्मशाला के उसी गौरवशाली इतिहास को ताजा कर दिया है।

Author: Manisha Thakur

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