Dehradun News: उत्तराखंड में डीएलएड (D.El.Ed) प्रवेश परीक्षा को वर्ष में दो बार आयोजित करने के प्रस्ताव पर शिक्षा विभाग ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। इस व्यवस्था को लागू करने से पहले विभाग अन्य राज्यों की परीक्षा प्रणालियों का गहन अध्ययन करेगा।
पूरे देश में प्राथमिक और बेसिक शिक्षक बनने के लिए डीएलएड प्रशिक्षण को अनिवार्य किए जाने के बाद से इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। इसी के मद्देनजर राज्य सरकार प्रदेश में प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए लगातार नए विकल्पों पर काम कर रही है।
उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर के सचिव विनोद सिमल्टी ने बताया कि हाल ही में 15 जून को शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय विभागीय बैठक हुई थी। बैठक में अंतिम निर्णय से पहले अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का विस्तृत अवलोकन करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीटें कम और आवेदन ज्यादा, हर साल सेवानिवृत्त हो रहे 1000 से अधिक शिक्षक
वर्तमान समय में उत्तराखंड के 13 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में प्रति संस्थान केवल 50-50 सीटें ही निर्धारित हैं। इस सीमित व्यवस्था के कारण हर साल महज 650 अभ्यर्थी ही अपना डीएलएड प्रशिक्षण पूरा कर पाते हैं, जो काफी कम है।
दूसरी तरफ, राज्य के सरकारी प्राथमिक स्कूलों से हर वर्ष एक हजार से अधिक शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इससे प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। इसी कमी को दूर करने के लिए विभाग सीटों की संख्या दोगुनी करने की योजना बना रहा है।
डीएलएड के प्रति युवाओं में बढ़ते क्रेज का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले सत्र में मात्र 650 सीटों के लिए 65 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इस भारी दबाव को देखते हुए ही सरकार साल में दो बार प्रवेश परीक्षा कराने पर विचार कर रही है।
Author: Harish Rawat


