Himachal News: हिमाचल प्रदेश में अनुबंध आधार पर काम करने वाले टीजीटी आर्ट्स शिक्षकों के लिए एक बहुत अच्छी खबर है। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने इन शिक्षकों को संशोधित वेतनमान का लाभ देने के औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं। यह फैसला उच्च न्यायालय के सख्त निर्देशों के बाद लिया गया है। शिक्षकों को 1 जनवरी 2016 से इस नए वेतनमान का वित्तीय लाभ मिलेगा। इस फैसले से लंबे समय से संघर्ष कर रहे शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है।
उच्च न्यायालय के आदेश पर शिक्षा विभाग की कार्रवाई
उच्च न्यायालय ने शिक्षा निदेशालय को शिक्षकों की याचिकाओं पर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इस आदेश का पालन करते हुए विभाग ने वेतन संशोधन लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इन टीजीटी शिक्षकों की नियुक्ति साल 2015 में अनुबंध के आधार पर हुई थी। बाद में साल 2018 में सरकार ने इन्हें नियमित कर दिया था। अब नियमितीकरण से पहले की अनुबंध अवधि के लिए भी वित्तीय लाभ दिया जा रहा है।
संशोधित वेतनमान नियम और शिक्षकों की प्रमुख मांग
शिक्षकों की मुख्य मांग न्यूनतम वेतन का 60 प्रतिशत लाभ प्राप्त करने की थी। प्रदेश सिविल सर्विस संशोधित वेतनमान नियम 2022 के तहत नियमित कर्मचारियों को पूरा वेतनमान मिलता है। वहीं अनुबंध कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतनमान का 60 फीसदी हिस्सा तय किया गया है। अब इसी सरकारी प्रावधान के अनुसार टीजीटी शिक्षकों के वेतन का दोबारा से पूरा निर्धारण किया जाएगा। शिक्षा विभाग ने इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा यह वित्तीय लाभ
शिक्षा निदेशालय ने साफ किया है कि यह वित्तीय लाभ अभी केवल अस्थायी तौर पर मिलेगा। उच्च न्यायालय में लंबित एक लेटर पेटेंट अपील (एलपीए) का अंतिम फैसला इस मामले को पूरी तरह तय करेगा। अगर भविष्य में अदालत का फैसला खिलाफ आता है तो विभाग दिए गए अतिरिक्त पैसे की वसूली भी कर सकता है। सरकार ने इस शर्त के साथ ही वेतन वृद्धि लागू करने का महत्वपूर्ण और बड़ा कदम उठाया है।
शिक्षा निदेशक ने स्कूल प्रमुखों को दिए सख्त निर्देश
शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने सभी स्कूल प्रमुखों को वेतन तय करने के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि अनुबंध अवधि के दौरान शिक्षकों का वेतन 60 प्रतिशत संशोधित न्यूनतम वेतनमान के हिसाब से तय करें। 1 जनवरी 2016 से नियमितीकरण तक की पूरी अवधि का भुगतान जल्द सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही शिक्षकों की सेवा पुस्तिका में इन सभी नई जानकारियों को अनिवार्य रूप से सही तरीके से तुरंत दर्ज किया जाए।


