UP Education News: इलाहाबाद विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति के तहत एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन की अनोखी पहल से छात्रों के बीच अंतःविषयक पाठ्यक्रमों को लेकर भारी उत्साह है। अब अलग-अलग संकायों के छात्र अपनी पारंपरिक सीमाएं तोड़कर नए विषयों की पढ़ाई कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय में अट्ठाईस मई से पंद्रह जून तक विशेष समर स्कूल कार्यक्रम चल रहा है। इस अनोखे अभियान में छात्र अपनी मूल स्ट्रीम से अलग कोर्स चुन रहे हैं। समर स्कूल में रजिस्ट्रेशन कराने वाले कुल आठ सौ पचास छात्र-छात्राओं में से सत्तर फीसदी ने दूसरे संकायों के विषयों को चुना है।
साइंस के छात्र पढ़ रहे गीता और आर्ट्स वाले सीख रहे एआई
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इस समर स्कूल में बड़ा ही दिलचस्प नजारा देखने को मिल रहा है। विज्ञान संकाय के छात्र अब भारतीय संविधान, श्रीमद्भगवद्गीता, तनाव प्रबंधन और उद्यमिता जैसे विषय पढ़ रहे हैं। वहीं कला वर्ग के छात्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, स्मार्ट केमिस्ट्री और जल प्रबंधन तकनीक सीख रहे हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक यह नया शैक्षणिक मॉडल छात्रों के सर्वांगीण विकास में काफी मदद करेगा। यदि साइंस का विद्यार्थी संविधान या संचार कौशल का ज्ञान पाता है, तो उसकी सामाजिक समझ बढ़ेगी। इसी तरह आर्ट्स का छात्र एआई या साइबर सुरक्षा सीखकर रोजगार के बेहतरीन अवसर हासिल कर सकेगा।
अगली क्लास में प्रमोशन के लिए कोर्स पास करना बेहद जरूरी
यह अभिनव पहल एनइपी-2020 के होलिस्टिक एंड मल्टीडिसिप्लिनरी लर्निंग मॉडल के पूरी तरह अनुकूल है। विश्वविद्यालय ने समर स्कूल में छात्रों को कुल इकतीस कौशल संवर्धन पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए हैं। ये दो क्रेडिट के कोर्स उन स्नातक छात्रों के लिए हैं, जो नियमित सत्र में इन्हें पूरा नहीं कर पाए थे।
जनसंपर्क अधिकारी प्रो. जया कपूर ने बताया कि यह व्यवस्था पारंपरिक शिक्षा मॉडल से बिल्कुल अलग है। विश्वविद्यालय ने साफ किया है कि दूसरे वर्ष में प्रोन्नति के लिए इन पाठ्यक्रमों को पास करना अनिवार्य है। इस शानदार पहल से छात्रों को अपनी प्रतिभा निखारने का एक बेहतरीन मौका मिला है।
Author: Rashmi Sharma


