अभिषेक मनु सिंघवी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, राज्यसभा चुनाव विवाद में हर्ष महाजन की दलीलें पड़ीं भारी

Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता और प्रख्यात वकील अभिषेक मनु सिंघवी की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। सिंघवी ने भाजपा सांसद हर्ष महाजन के राज्यसभा निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका में गवाहों के नाम हटाने की मांग की थी। जस्टिस वीरेंद्र सिंह की बेंच ने शुक्रवार को यह महत्वपूर्ण आदेश सुनाया। इस फैसले के बाद राज्यसभा चुनाव से जुड़ा विवाद अब और गहरा गया है। कोर्ट ने साफ किया कि प्रतिवादी को अपने बचाव में साक्ष्य पेश करने का पूरा अधिकार है।

गवाहों की लंबी सूची पर सिंघवी ने जताई थी कड़ी आपत्ति

अभिषेक मनु सिंघवी ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 87(1) के तहत कोर्ट में आवेदन किया था। उन्होंने तर्क दिया कि हर्ष महाजन ने 18 गवाहों की जो सूची दी है, उनमें से अधिकांश अनावश्यक हैं। सिंघवी के अनुसार, गवाहों के नाम केवल केस में देरी करने के उद्देश्य से शामिल किए गए थे। उन्होंने विशेष रूप से क्रम संख्या 2 से 14 तक के गवाहों को अप्रासंगिक बताया था। याचिकाकर्ता का मानना था कि इससे उनके हितों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

हर्ष महाजन ने कोर्ट में सिंघवी के तर्कों का किया कड़ा विरोध

भाजपा नेता हर्ष महाजन के वकीलों ने सिंघवी के इन आरोपों का अदालत में डटकर विरोध किया। उन्होंने कहा कि सिंघवी का आवेदन पूरी तरह से गलत धारणा पर आधारित है। महाजन का तर्क था कि ये गवाह निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी हैं। निर्वाचन प्रक्रिया की वैधता और मतों की गिनती के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया को सिद्ध करने के लिए इन अधिकारियों की गवाही अनिवार्य है। उन्होंने इसे साक्ष्य प्रस्तुत करने के अपने वैधानिक अधिकार का हिस्सा बताया।

हाईकोर्ट ने माना- साक्ष्य प्रस्तुत करना प्रतिवादी का वैधानिक अधिकार

जस्टिस वीरेंद्र सिंह ने मामले के रिकॉर्ड की बारीकी से जांच करने के बाद सिंघवी की आपत्तियों को नकार दिया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि प्रतिवादी के पास अपने बचाव के समर्थन में सबूत देने का कानूनी हक है। कोर्ट ने पाया कि सिंघवी यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहे कि प्रस्तावित गवाह कैसे परेशान करने वाले हैं। बेंच ने स्पष्ट किया कि साक्ष्यों के बिना केवल विलंब का आरोप लगाना गवाहों के नाम हटाने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता।

अब 20 अप्रैल को दर्ज होंगे गवाहों के महत्वपूर्ण बयान

अदालत ने यह भी साफ किया कि अधिकांश गवाह चुनाव प्रक्रिया, गिनती और वीडियोग्राफी से जुड़े अधिकारी हैं। ऐसे में उनकी गवाही को अप्रासंगिक नहीं माना जा सकता। कोर्ट की इन टिप्पणियों का मुख्य चुनाव याचिका के गुणों पर कोई स्थायी प्रभाव नहीं पड़ेगा। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले को 20 अप्रैल, 2026 के लिए सूचीबद्ध किया गया है। उस दिन अतिरिक्त रजिस्ट्रार (न्यायिक) के समक्ष हर्ष महाजन के पक्ष के गवाहों के साक्ष्य दर्ज करने की तिथियां तय की जाएंगी।

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