Madhya Pradesh News: सूचना के अधिकार को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार के उस पुराने नोटिफिकेशन को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। इसके जरिए स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट लोकायुक्त को आरटीआई के दायरे से बाहर रखा गया था।
शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार के इस पुराने कदम को पूरी तरह गैरकानूनी करार दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ तौर पर कहा कि भ्रष्टाचार की जांच करने वाली सरकारी एजेंसियों को इस तरह की कानूनी छूट बिल्कुल नहीं मिल सकती। इस फैसले के बाद जवाबदेही तय होगी।
सर्वोच्च अदालत ने मामले में की बेहद तल्ख टिप्पणी
इस बड़े मामले की लाइव सुनवाई के दौरान माननीय न्यायाधीशों ने बहुत कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि मध्य प्रदेश की स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट मुख्य रूप से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के तहत दर्ज होने वाले संगीन अपराधों की जांच का काम करती है।
अदालत ने आगे जोड़ा कि इसे आरटीआई कानून की धारा 24(4) के तहत आने वाले किसी खुफिया या सुरक्षा संगठन की श्रेणी में नहीं माना जा सकता। राज्य सरकार ने अपनी कानूनी सीमाओं से बाहर जाकर जांच एजेंसी को अवैध रूप से बचाने का प्रयास किया था, जो गलत है।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर लगी अंतिम मुहर
सर्वोच्च अदालत ने अपने नए आदेश में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 20 दिसंबर 2021 के ऐतिहासिक फैसले को बिल्कुल सही माना है। राज्य सरकार ने उस वक्त हाई कोर्ट के सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अपील दायर की थी।
अब शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की इस मुख्य याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। इसके साथ ही इस केस से संबंधित सभी पेंडिंग आवेदनों का भी निपटारा कर दिया गया है। अब आम नागरिक लोकायुक्त से पारदर्शी तरीके से जानकारी मांग सकेंगे।
आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को लेकर स्थिति की साफ
हालांकि इस महत्वपूर्ण फैसले में कोर्ट ने एक जरूरी तकनीकी पहलू को भी रेखांकित किया है। अदालत ने अपने फाइनल जजमेंट में स्पष्ट किया कि उसने इस सरकारी अधिसूचना की वैधता का परीक्षण केवल स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट लोकायुक्त के लिए ही किया है।
इस आदेश का प्रभाव ‘राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो’ पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा। इसका मतलब यह है कि आरटीआई से छूट का यह नोटिफिकेशन फिलहाल आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो पर पहले की तरह ही लागू रहेगा। उसे इस अदालती आदेश से अलग रखा गया है।
Reported By: Vijay Chouhan


