Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के छोटे डेयरी कारोबारियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (Milkfed) ने दूध खरीद प्रक्रिया में बदलाव करते हुए प्रति उत्पादक रोजाना 20 लीटर दूध खरीद की सीमा निर्धारित कर दी है। यह कदम मुख्य रूप से सीमांत किसानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
इस नीति के पीछे का मुख्य तर्क यह सुनिश्चित करना है कि सरकार द्वारा दी जा रही बढ़ी हुई न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ केवल बड़े डेयरी मालिकों तक सीमित न रहे। इस सीमा के निर्धारण से छोटे पशुपालकों को अपनी उपज का सही दाम और बेहतर बाजार सुनिश्चित हो पाएगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
दूध की MSP में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
हिमाचल प्रदेश सरकार ने दूध उत्पादकों के हितों को ध्यान में रखते हुए MSP में ऐतिहासिक वृद्धि की है। अब राज्य में गाय के दूध की MSP को 32 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसी प्रकार, भैंस के दूध की MSP भी 47 रुपये से बढ़कर 61 रुपये प्रति लीटर हो गई है। यह भारी बढ़ोतरी किसानों की आय में सीधे तौर पर बड़ा उछाल लाएगी।
प्रवक्ता के अनुसार, दूध की आकर्षक कीमतों के कारण सहकारी प्रणाली में भाग लेने वाले डेयरी किसानों की संख्या में भी तेजी आई है। पिछले दो वर्षों में पंजीकृत किसानों की संख्या 28,645 से बढ़कर 42,500 तक पहुंच गई है। राज्य में दूध कलेक्शन की क्षमता भी प्रतिदिन 1.57 लाख लीटर से बढ़कर 2.20 लाख लीटर हो गई है, जो क्षेत्र की बढ़ती सक्रियता को दर्शाती है।
सहकारी प्रणाली से किसानों को मिल रहा संबल
हिमाचल सरकार का लक्ष्य दुग्ध उत्पादन को एक लाभदायक व्यवसाय के रूप में स्थापित करना है। दूध खरीद की नई सीमा और MSP में हुई बढ़ोतरी से राज्य के ग्रामीण इलाकों में पशुपालन को नया संबल मिलेगा। छोटे किसानों के लिए यह योजना न केवल उनकी वित्तीय स्थिति में सुधार करेगी, बल्कि उन्हें संगठित बाजार से भी जोड़ेगी।
इस पहल से राज्य में दुग्ध उत्पादन का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। सरकार की ओर से पशुपालकों को तकनीकी और आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है ताकि वे उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता पर भी ध्यान दे सकें। आने वाले समय में ये कदम हिमाचल को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।
Author: Sunita Gupta


