Delhi News: पिछले 24 घंटों से सोशल मीडिया से लेकर आम बाजारों तक सिर्फ एक ही चर्चा हर तरफ बहुत तेजी से चल रही है। लोग लगातार सवाल पूछ रहे हैं कि क्या भारत सरकार ने देश का सोना चुपके से बेच दिया है? एक विदेशी रिपोर्ट आने के बाद देश में इस पर सियासी घमासान छिड़ गया है।
इस पूरे विवाद की मुख्य शुरुआत दिग्गज अमेरिकी आर्थिक मीडिया संस्थान ब्लूमबर्ग (Bloomberg) की एक ताजा रिपोर्ट से हुई थी। इस रिपोर्ट में एक आर्थिक विशेषज्ञ ने दावा किया कि रिजर्व बैंक (RBI) ने मई के अंतिम दो हफ्तों में करीब 12 अरब डॉलर का सोना बाजार में बेचा है।
इस रिपोर्ट में आगे यह भी तर्क दिया गया कि मिडिल ईस्ट में चल रहे भारी तनाव के बीच विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए आरबीआई को यह कदम उठाना पड़ा। इस खबर के सामने आते ही भारतीय बाजारों और सोशल मीडिया पर अचानक हड़कंप की स्थिति पैदा हो गई।
सरकार और आरबीआई ने खबरों का किया पूर्ण खंडन
जैसे ही यह भ्रामक खबर बाजार में फैली, सरकार और बैंकिंग सूत्रों ने तुरंत सामने आकर स्थिति साफ की। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकारी सूत्रों ने कहा है कि यह खबर पूरी तरह झूठी और बेबुनियाद है। रिजर्व बैंक ने अपने खजाने से एक ग्राम सोना भी नहीं बेचा है।
विदेशी रिपोर्ट में सोना कम होने का जो दावा किया गया था, उसके पीछे की वजह कुछ और है। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है। आंकड़ों में दिख रहा अंतर इसी वैल्यूएशन के अलग तौर-तरीकों की वजह से था, न कि सोना बेचने से।
विपक्ष के तीखे हमले और 1991 के दौर की चर्चा
सोने की यह खबर आते ही देश में राजनीति भी बहुत तेज हो गई। विपक्षी पार्टियों ने सोशल मीडिया पर सरकार को घेरते हुए कई तीखे पोस्ट किए। इसके बाद आम लोग इंटरनेट पर साल 1991 के उस आर्थिक संकट के दौर की चर्चा करने लगे, जब सोना गिरवी रखना पड़ा था।
आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, आज भारत की वित्तीय स्थिति 1991 के मुकाबले बेहद मजबूत है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार इस समय अपने रिकॉर्ड स्तर पर मौजूद है। इसलिए किसी भी नागरिक को अफवाहों में आकर पैनिक होने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है।
Author: Rahul Sharma


