ओ-जोन का खौफ: यमुना से 5 किमी दूर फिर भी कागजों में नदी किनारे बसी हैं 50 कॉलोनियां, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी

Delhi News: बदरपुर विधानसभा क्षेत्र के नहरपार मीठापुर, सौरभ विहार, हरिनगर और जैतपुर विस्तार की 50 कॉलोनियों में रहने वाले लोग इन दिनों गहरे डर के साये में जीने को मजबूर हैं। इन इलाकों की करीब तीन लाख की आबादी को दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) द्वारा ‘ओ’ जोन से बाहर नहीं किया गया है।

सरकारी रिकॉर्ड में इन सभी घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों को यमुना नदी के बिल्कुल किनारे दिखाया गया है। हैरानी की बात यह है कि वास्तव में नदी किनारे से इन कॉलोनियों की जमीनी दूरी लगभग 5.6 किलोमीटर है। शहरी विकास मंत्रालय के अंतर्गत डीडीए ने इन्हें ओ-जोन का मामला बताया है।

कागजों की बड़ी गलती पर निवासियों ने उठाए गंभीर सवाल

स्थानीय निवासियों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) का सवाल है कि जो कॉलोनियां यमुना नदी से इतनी दूर हैं, उन्हें सरकारी दस्तावेजों में नदी की तलहटी में कैसे दर्ज कर दिया गया। आरडब्ल्यूए ने इस गंभीर विसंगति को लेकर डीडीए के प्लानिंग कमिश्नर को एक आधिकारिक पत्र भेजा है।

एसोसिएशन ने इन 50 कॉलोनियों को तुरंत ओ-जोन से बाहर निकालने की पुरजोर मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि उनकी इस जायज मांग पर जल्द ही सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो वे आगामी 15 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन करेंगे।

पीएम उदय योजना से भी वंचित रह गए लाखों लोग

रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के मुताबिक, केंद्र सरकार ने पीएम उदय योजना के तहत दिल्ली की कुल 1731 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का फैसला किया था। लेकिन दिल्ली सरकार ने इनमें से केवल 1511 कॉलोनियों को ही मंजूरी दी। इस कारण मीठापुर, हरिनगर और जैतपुर की कई कॉलोनियां इस लाभ से वंचित रह गईं।

मास्टर प्लान 2021 को तैयार करते समय डीडीए की प्लानिंग विंग की एक तकनीकी गलती के कारण इन पुरानी बसी हुई कॉलोनियों को ओ-जोन (यमुना फ्लडप्लेन क्षेत्र) घोषित कर दिया गया था। जबकि इससे पहले 28 सितंबर 2013 को इस पूरे क्षेत्र को ओ-जोन से हटाकर ‘एफ’ जोन में शामिल किया गया था।

तत्कालीन उपराज्यपाल ने भी स्वीकार की थी डीडीए की चूक

डीडीए की प्लानिंग विंग ने 13 अगस्त 2014 को भारत सरकार को लिखे एक पत्र में तत्कालीन उपराज्यपाल की उस बात का जिक्र किया था, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि जैतपुर, हरिनगर और मीठापुर की कॉलोनियां गलती से ओ-जोन में शामिल हो गई हैं। तब ओ-जोन की सीमा दोबारा तय करने को कहा गया था।

इसके बाद 5 जुलाई 2019 को डीडीए ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को सूचित किया कि सीमांकन का काम पूरा हो चुका है। वहीं, 30 जनवरी को एक विशेष कमेटी को जवाब देते हुए डीडीए ने माना था कि जैतपुर, मीठापुर और हरिनगर के इलाके ओ-जोन की सीमा से बिल्कुल बाहर हैं।

भारी-भरकम शुल्क लेने के बाद भी मालिकाना हक नहीं

इन अनधिकृत कॉलोनियों में डीडीए ने पीएम उदय योजना के तहत रजिस्ट्रेशन और मकानों के डिजिटल सर्वे के लिए संबंधित एजेंसियों के माध्यम से जनता से भारी-भरकम शुल्क भी वसूला था। स्थानीय निवासियों को मालिकाना हक देने के नाम पर उनके मकानों के सभी जरूरी दस्तावेज डीडीए के सरिता विहार कार्यालय में जमा कराए गए थे।

इन कॉलोनियों के बीच में पहले से ही सरकारी ईको पार्क, 12वीं कक्षा तक के बड़े सरकारी स्कूल और डीडीए के फ्लैट्स बने हुए हैं। आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष सरजीत चौकन ने नवनिर्वाचित सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी से गुहार लगाई है कि बची हुई 50 कॉलोनियों को अधिकृत सूची में डलवाकर जनता को तनाव से मुक्ति दिलाएं।

Author: Gaurav Malhotra

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