सैदुलाजाब हादसे के बाद जागी MCD, अवैध इमारतों पर चलेगा बुलडोजर; खाली करने का अल्टीमेटम

Delhi News: दिल्ली के सैदुलाजाब इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने और छह लोगों की मौत के बाद नगर निगम (MCD) एक्शन मोड में आ गया है। इस दर्दनाक हादसे के बाद मची किरकिरी को देखते हुए प्रशासन ने पूरे इलाके में अवैध निर्माण के खिलाफ बड़े पैमाने पर सघन अभियान शुरू कर दिया है।

चिह्नित 42 अवैध इमारतों पर होगी बड़ी कार्रवाई

एमसीडी के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, सैदुलाजाब और उसके आस-पास के क्षेत्रों में कुल 81 इमारतों को अवैध निर्माण के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था। इनमें से 42 बेहद संवेदनशील मामलों पर तत्काल कार्रवाई की तैयारी है। नियमों के अनुसार, इन अवैध निर्माणों को या तो पूरी तरह सील किया जाएगा या बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया जाएगा।

इलाके में अवैध निर्माण की अत्यधिक संभावना को देखते हुए खिड़की एक्सटेंशन समेत कई संवेदनशील पॉकेट्स में जोनल टीमें तैनात की गई हैं। यह विशेष सर्वे टीम हर वार्ड में जाकर ऐसी खतरनाक और अवैध बहुमंजिला इमारतों की सूची तैयार कर रही है, ताकि भविष्य में सैदुलाजाब जैसा बड़ा हादसा दोबारा न हो सके।

मकान खाली करने के लिए मिला 72 घंटे का नोटिस

निगम अधिकारियों ने सोमवार को छह भवन स्वामियों को सीलिंग का कड़ा नोटिस थमा दिया है। इन सभी को अपनी संपत्ति खाली करने के लिए महज 72 घंटे की मोहलत दी गई है। इसके अलावा दो अन्य इमारतों को भी सीलिंग के दायरे में लाया गया है, जहां अवैध तरीके से अतिरिक्त फ्लोर बनाए गए थे।

हादसे वाली जगह के पास मौजूद एक झुकी हुई खतरनाक इमारत से फिलहाल छात्रों को अपना कीमती सामान जैसे लैपटॉप और दस्तावेज निकालने की इजाजत नहीं दी गई है। एमसीडी का कहना है कि इमारत की स्थिति बेहद नाजुक है, इसलिए किसी भी नागरिक की जान को जोखिम में नहीं डाला जा सकता है।

12 साल पुरानी इमारत पर अवैध तरीके से तने नए फ्लोर

निगम की शुरुआती जांच रिपोर्ट के अनुसार, जो इमारत जमींदोज हुई है वह करीब 300 वर्ग मीटर में फैली थी। इसका बेसमेंट और शुरुआती दो फ्लोर करीब 12-13 साल पहले बने थे, लेकिन हाल ही में इसके ऊपर अवैध रूप से तीसरी और चौथी मंजिल तान दी गई, जिससे पूरी इमारत का संतुलन बिगड़ गया।

यह पूरी इमारत एक ऐसी अनधिकृत कॉलोनी में स्थित है, जो दिल्ली सरकार की नियमितीकरण के लिए चिह्नित 1511 कॉलोनियों की सूची में भी शामिल नहीं है। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान मलबे को हटाने और जिला आपदा प्रबंधन समिति (DDMA) के साथ मिलकर बेसमेंट में दबी गाड़ियों को सुरक्षित बाहर निकालने पर है।

Author: Gaurav Malhotra

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