हिमाचल नगर निगम नतीजों में बड़ा उलटफेर, तीन शहरों में भाजपा मजबूत, पालमपुर में कांग्रेस का दबदबा

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के चार नगर निगमों धर्मशाला, पालमपुर, मंडी और सोलन में मतगणना ने सियासी तस्वीर साफ कर दी है। मंडी, धर्मशाला और सोलन में भाजपा ने मजबूत प्रदर्शन किया, जबकि पालमपुर में कांग्रेस ने बड़ी बढ़त बनाकर मुकाबले को दिलचस्प मोड़ दे दिया।

नगर निगमों के साथ जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों की मतगणना भी सुबह नौ बजे शुरू हुई। 250 जिला परिषद सदस्यों और 1,769 में से 1,684 पंचायत समिति सदस्यों के नतीजों पर भी सबकी नजर रही। ग्रामीण और शहरी दोनों स्तरों पर यह चुनाव बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।

चार नगर निगमों की सियासी तस्वीर बदली

मंडी नगर निगम में भाजपा ने सबसे बड़ी जीत दर्ज की। पार्टी ने 14 में से 12 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। कांग्रेस केवल एक सीट पर जीत दर्ज कर पाई, जबकि एक सीट निर्दलीय प्रत्याशी के खाते में गई। इस नतीजे ने मंडी में भाजपा संगठन की पकड़ मजबूत दिखाई।

धर्मशाला नगर निगम में भी भाजपा ने बढ़त को जीत में बदला। 17 में से 11 सीटें जीतकर पार्टी ने मेयर और डिप्टी मेयर पद की राह आसान कर ली। कांग्रेस को पांच सीटों से संतोष करना पड़ा। एक सीट निर्दलीय प्रत्याशी ने जीती, जिससे स्थानीय समीकरणों की भूमिका भी साफ दिखी।

सोलन नगर निगम में भी भाजपा ने मजबूत प्रदर्शन किया। उपलब्ध अपडेट के अनुसार पार्टी ने बहुमत के करीब या उससे आगे की स्थिति बनाई। एक अपडेट में भाजपा को 10 सीटें, जबकि अंतिम रुझान में 11 सीटों तक पहुंचता बताया गया। कांग्रेस ने पांच से छह सीटों पर जीत दर्ज की।

पालमपुर नगर निगम ने कांग्रेस को बड़ी राहत दी। शुरुआती 10 सीटों के नतीजों में कांग्रेस ने नौ सीटें जीतकर जोरदार प्रदर्शन किया। भाजपा केवल एक सीट पर सिमटती दिखी। यह नतीजा इसलिए अहम है, क्योंकि बाकी तीन नगर निगमों में भाजपा ने बेहतर प्रदर्शन किया।

मंडी में भाजपा ने सबसे बड़ी जीत दर्ज की

मंडी नगर निगम में भाजपा की जीत शुरू से ही मजबूत दिखी। दूसरे राउंड में पांचों सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। इसके बाद पार्टी का आंकड़ा 10 में से आठ सीटों तक पहुंच गया। अंतिम तस्वीर में भाजपा 14 में से 12 सीटों पर जीत दर्ज करती दिखी।

मंडी के पैलेस-एक वार्ड से भाजपा प्रत्याशी गुरदीप कौर 278 वोट से विजेता घोषित हुईं। वार्ड पांच मंगवाई से भाजपा की कृष्णा ठाकुर ने जीत हासिल की। वार्ड 11 समखेतर से भाजपा प्रत्याशी जानी जीते, जबकि वार्ड 15 दोहंदी से भी भाजपा प्रत्याशी ने बाजी मारी।

मंडी में कुछ बड़े राजनीतिक चेहरों को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष रणबीर सिंह और पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर के भतीजे परवीन ठाकुर चुनाव हार गए। वहीं, खलियार वार्ड से कांग्रेस की असंतुष्ट अलकनंदा हांडा ने जीत दर्ज कर स्थानीय राजनीति को नया मोड़ दिया।

वार्ड नंबर चार में कांग्रेस की नर्मदा मोहन ने 127 मतों से जीत दर्ज की। मंडी में भाजपा की लहर के बीच कांग्रेस के लिए यह जीत राहत लेकर आई। हालांकि कुल मिलाकर मंडी नगर निगम की सत्ता पर भाजपा का कब्जा साफ दिखा, जिससे विपक्ष को बड़ा झटका लगा।

धर्मशाला और सोलन में भगवा बढ़त कायम

धर्मशाला नगर निगम में भाजपा ने 17 में से 11 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। कांग्रेस को पांच सीटें मिलीं और एक सीट निर्दलीय प्रत्याशी ने जीती। धर्मशाला में यह जीत भाजपा के लिए अहम है, क्योंकि यहां मेयर और डिप्टी मेयर दोनों पदों पर पार्टी की दावेदारी मजबूत हुई।

धर्मशाला में एक पूर्व महापौर और एक उपमहापौर को हार का सामना करना पड़ा। दोनों निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में थे। एक वार्ड तीन से और दूसरा वार्ड छह से चुनाव लड़ रहा था। इन नतीजों ने दिखाया कि पुराने चेहरों पर मतदाताओं ने पूरी तरह भरोसा नहीं जताया।

वार्ड नंबर एक फरसेटगंज में भाजपा की रेखा ने जीत दर्ज की। महिला आरक्षित इस वार्ड में कांग्रेस प्रत्याशी हिमांशी को 216 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी रेखा को 263 मत मिले। नौ मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना। यह मुकाबला अंत तक नजदीकी माना जा रहा था।

धर्मशाला के वार्ड दो भागसू में भाजपा प्रत्याशी शमशेर नैहरिया ने 676 वोट लेकर जीत दर्ज की। कांग्रेस प्रत्याशी अशोक पठानिया को 231 मत मिले, जबकि निर्दलीय ओंकार सिंह को 422 वोट मिले। इस वार्ड में निर्दलीय प्रत्याशी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाया, लेकिन भाजपा आगे रही।

वार्ड तीन में भाजपा की आशा ने 368 वोट लेकर जीत हासिल की। कांग्रेस की सुदर्शन कुमारी को 254 मत मिले। वार्ड चार से पूर्व महापौर नीनू शर्मा ने जीत दर्ज की। उन्हें 608 मत मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी नेहा को 249 और निर्दलीय उम्मीदवार को 112 वोट मिले।

धर्मशाला के वार्ड पांच में कांग्रेस की शैलजा ने 643 वोट लेकर जीत दर्ज की। भाजपा की अरुणा कुमारी को 405 मत मिले। वार्ड छह और सात में भाजपा प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। शुरुआती आठ वार्डों में भाजपा छह सीटों पर आगे रही, जबकि कांग्रेस दो सीटें जीत पाई।

सोलन नगर निगम में शुरुआती रुझान भाजपा के पक्ष में रहे। पहले राउंड में भाजपा पांच वार्डों पर आगे दिखी। दो वार्डों में भाजपा के बागी बढ़त बनाए हुए थे, जबकि कांग्रेस केवल दो वार्डों में आगे रही। यही रुझान आगे चलकर भाजपा के लिए मजबूत स्थिति में बदलता गया।

सोलन में कई वार्डों ने बदला गणित

सोलन नगर निगम के वार्ड नंबर एक में भाजपा की नीलम ने 299 मत लेकर जीत दर्ज की। कांग्रेस की अर्चना ठाकुर को 186 वोट मिले। यह नतीजा भाजपा के लिए मजबूत शुरुआत साबित हुआ। पहले ही वार्ड से मिली बढ़त ने आगे की मतगणना में पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया।

वार्ड दो में निर्दलीय रमेश बंसल ने 346 वोट लेकर जीत दर्ज की। भाजपा की सुषमा शर्मा को 282 और कांग्रेस के सुनील कुमार को 58 मत मिले। एक वोट नोटा में गया। इस वार्ड में निर्दलीय प्रत्याशी की जीत ने दलों के पारंपरिक समीकरणों को चुनौती दी।

वार्ड तीन में निर्दलीय गौरव राजपूत ने 96 वोट लेकर जीत हासिल की। कांग्रेस के सरदार सिंह को 48 मत मिले। भाजपा के पीयूष गर्ग और दीपिन बख्शी दोनों को 55-55 वोट मिले। यह मुकाबला छोटे अंतर और स्थानीय समर्थन के कारण चर्चा में रहा।

वार्ड चार में भाजपा के रोहित भारद्वाज ने 278 वोट लेकर जीत दर्ज की। कांग्रेस की संगीता ठाकुर को 217 मत मिले। निर्दलीय राकेश को सात वोट मिले और आठ मत नोटा में गए। भाजपा ने इस वार्ड में निर्णायक बढ़त बनाकर सोलन की तस्वीर और साफ कर दी।

वार्ड पांच में भाजपा की प्रियंका ने 289 वोट हासिल किए। कांग्रेस की गीतांजलि को 181 मत मिले, जबकि पांच मतदाताओं ने नोटा दबाया। वार्ड छह में भाजपा की रेखा साहनी ने 263 मत लेकर जीत दर्ज की। कांग्रेस की सत्या वर्मा को 243 वोट मिले।

वार्ड सात में कांग्रेस की पूजा 183 मतों के साथ आगे रहीं। भाजपा के अशोक ठाकुर को 175 वोट मिले। निर्दलीय मनोज रघुवंशी को 126 मत मिले। मुकेश शर्मा और रविंदर रवि को 30-30 वोट मिले, जबकि रामपाल को तीन वोट मिले। यह मुकाबला बेहद रोचक रहा।

वार्ड आठ में कांग्रेस की पूनम ग्रोवर और भाजपा के सुरेंद्र के बीच कड़ा मुकाबला हुआ। पूनम को 255 वोट मिले, जबकि सुरेंद्र 265 मतों के साथ आगे रहे। दस वोट के अंतर ने इस वार्ड को सोलन के सबसे नजदीकी मुकाबलों में शामिल कर दिया।

पालमपुर ने कांग्रेस को बड़ी राहत दी

पालमपुर नगर निगम में कांग्रेस ने सबसे मजबूत प्रदर्शन किया। शुरुआती 10 सीटों के नतीजों में कांग्रेस ने नौ सीटों पर जीत दर्ज की। भाजपा को केवल एक सीट मिली। बाकी नगर निगमों में भाजपा की बढ़त के बीच पालमपुर का नतीजा कांग्रेस के लिए बड़ी राजनीतिक राहत बना।

पालमपुर के वार्ड एक लोहना से कांग्रेस उम्मीदवार इंद्रपाल ने जीत दर्ज की। इंद्रपाल को 858 मत मिले और वह करीब 200 वोट के अंतर से विजयी रहे। वार्ड तीन पालमपुर खास से कांग्रेस प्रत्याशी रणजीत कौर चुनाव जीतीं। इन जीतों ने कांग्रेस की बढ़त को और मजबूत किया।

पालमपुर का जनादेश बाकी नगर निगमों से अलग रहा। यहां कांग्रेस के पक्ष में आए नतीजों ने यह संकेत दिया कि स्थानीय मुद्दे और प्रत्याशी की छवि मतदाताओं के फैसले में बड़ी भूमिका निभाते हैं। भाजपा जहां तीन नगर निगमों में मजबूत रही, वहीं पालमपुर में कांग्रेस ने अपनी जमीन बचाई।

वार्ड स्तर पर कई बड़े चेहरे पीछे रहे

चारों नगर निगमों में कई मुकाबले ऐसे रहे, जहां स्थानीय पहचान ने पार्टी लहर को चुनौती दी। धर्मशाला में पूर्व महापौर और उपमहापौर की हार ने यही संदेश दिया। सोलन में निर्दलीय उम्मीदवारों ने कई सीटों पर समीकरण बिगाड़े। मंडी में भी कुछ चर्चित चेहरों को मतदाताओं ने नकार दिया।

नतीजों में भाजपा को मंडी, धर्मशाला और सोलन में बड़ी सफलता मिली। कांग्रेस ने पालमपुर में दमदार वापसी की और कुछ वार्डों में भाजपा को कड़ी टक्कर दी। निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी कई जगह मुकाबला त्रिकोणीय बनाया। इससे साफ है कि स्थानीय निकाय चुनावों में व्यक्तिगत संपर्क बहुत असर डालता है।

सोलन के कई वार्डों में बागियों और निर्दलीयों की भूमिका साफ नजर आई। वार्ड दो और तीन में निर्दलीय प्रत्याशियों ने मजबूत प्रदर्शन किया। भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए यह संकेत है कि टिकट वितरण और स्थानीय संगठन की नाराजगी चुनावी नतीजों को सीधे प्रभावित कर सकती है।

पंचायत समिति और जिला परिषद की गिनती भी जारी

नगर निगमों के साथ पंचायती राज संस्थाओं की मतगणना भी जारी रही। जिला परिषद सदस्यों की मतगणना के लिए 15 से 20 टेबल लगाए गए। एक वार्ड की मतगणना के लिए लगभग 35 अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए, ताकि प्रक्रिया व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके।

लाहुल स्पीति की एक जिला परिषद सीट के लिए किसी ने नामांकन दाखिल नहीं किया। वहां विरोध के तौर पर चुनाव का बहिष्कार किया गया। इस बीच बाकी जिलों में जिला परिषद और पंचायत समिति के परिणामों को लेकर भी राजनीतिक दलों और स्थानीय नेताओं की नजरें मतगणना केंद्रों पर टिकी रहीं।

सुबह नौ बजे शुरू हुई गिनती के साथ ही चारों नगर निगमों की तस्वीर बदलती रही। शुरुआती रुझानों में भाजपा कई सीटों पर आगे निकली। बाद में मंडी, धर्मशाला और सोलन में भाजपा ने बढ़त को जीत में बदला। पालमपुर में कांग्रेस ने लगातार जीत दर्ज कर अलग संदेश दिया।

नगर निगम चुनावों के ये नतीजे शहरी मतदाताओं के मूड को दिखाते हैं। भाजपा ने तीन नगर निगमों में मजबूत पकड़ बनाई, जबकि कांग्रेस ने पालमपुर में बड़े अंतर से अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। अब मेयर और डिप्टी मेयर पदों को लेकर अगले दौर की राजनीतिक हलचल तेज होने वाली है।

Author: Sunita Gupta

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